Monday, January 17, 2022
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गुपकार अलायंस को लेकर झगड़ा क्यों है, क्या है गुपकार एलायंस…..

श्रीनगर में एक गुपकार रोड है और नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला का यहीं पर आवास है. राजनीतिक दलों की फारूक अब्दुल्ला के आवास पर बुलाई गई बैठक में पारित प्रस्ताव को गुपकार घोषणा का नाम दिया गया है.

श्रीनगर/दिल्ली: जम्मू कश्मीर में स्थानीय निकाय के चुनावों से पहले बने गुपकार अलायंस को लेकर राजनीति तेज हो गई है. गुपकार अलायंस में नेशनल कॉन्फ्रेंस, पीडीपी, पीपल्स कॉन्फेंस, सीपीआई (एम) पीपल्स यूनाइटेड फ्रंट, पैंथर्स पार्टी और अवामी नैशनल कॉन्फ्रेंस शामिल है. इन सभी ने जम्मू-कश्मीर में आर्टिकल 370 और आर्टिकल 35ए की वापसी की लड़ाई साथ लड़ने का संकल्प लिया है. ये सभी दल एक साथ जम्मू-कश्मीर में स्थानीय निकाय लड़ रहे हैं.

जानिए अब तक 10 बड़ी बातें

1. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुपकर घोषणापत्र गठबंधन (पीएजीडी) को “नापाक वैश्विक गठजोड़” करार दिया जो कांग्रेस के साथ आतंक और अशांति के दौर की वापसी चाहता है. उन्होंने कहा, “कांग्रेस और गुपगर गैंग जम्मू कश्मीर को आतंक और अशांति के युग में वापस ले जाना चाहते हैं. अनुच्छेद 370 को हटाकर हमने वहां के दलितों, महिलाओं और आदिवासियों को जो अधिकार प्रदान किए हैं उसे वे वापस लेना चाहते हैं. यही कारण है कि उन्हें देश की जनता हर जगह से खारिज कर रही है.”

2. जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती ने शाह के आरोपों की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि सियासी गठबंधन के स्थानीय निकाय चुनाव लड़ने और भाजपा व उसके सहयोगियों को खुली छूट नहीं देने का फैसला गृह मंत्री की “कुंठा”की वजह है.

3. महबूबा ने एक के बाद एक कई ट्वीट कर कहा, “खुद को मसीहा और राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों को देश का दुश्मन की तरह पेशकर भारत को बांटने के भाजपा के हथकंडे का अनुमान लगाया जा सकता है. ”उन्होंने कहा, ‘‘बढ़ती बेरोजगारी और महंगाई (जैसे मुद्दों) के स्थान पर लव जेहाद, टुकड़े-टुकड़े और अब गुपकर गैंग राजनीतिक विमर्श में हावी हो गया है. ’’

4. नेशनल कॉन्फ्रेंस के उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने कहा, ‘‘ हम गैंग नहीं हैं अमितशाह जी, हम वैध राजनीतिक गठबंधन हैं जिसने चुनाव लड़े हैं और लड़ते रहेंगे और यही बात आपको परेशान कर रही है.’’ उमर अब्दुल्ला ने कहा, ‘‘ मैं माननीय गृहमंत्री के इस हमले के पीछे की कुंठा समझ सकता हूं. उन्हें बताया गया था कि यह गठबंधन चुनाव का बहिष्कार करने की तैयारी कर रहा है. इससे भाजपा और नवगठित दल को खुला मैदान मिल जाता। हमने उनकी उम्मीदें पूरी नहीं की.

5. केन्द्रीय गृह राज्यमंत्री जी किशन रेड्डी ने कहा कि ऐसे लोगों का राजनीतिक सर्कल और जनता द्वारा बहिष्कार किया जाना चाहिए.

6. आरएसएस नेता इंद्रेश कुमार ने कहा कि ये सभी फेल्ड पार्टियां हैं, चाहे कांग्रेस हो, एनसी, पीडीपी या लेफ्ट पार्टियां, बार बार परीक्षा में फेल हुए हैं.. जनता समझ चुकी है.. अमित शाह के बयान से देश प्रसन्न है.. आप सभी फेल्ड पार्टियां हैं, संविधान के खिलाफ जाने वाली पार्टियां हैं, अब आपने हाथ मिलाया है तो क्या आप देश को संविधान से अलग रास्ते पर ले जाना चाहते हैं.. कश्मीर में भी ये फेल होंगे.

7. कांग्रेस के जम्मू कश्मीर अध्यक्ष गुलाम अहमद मीर ने कहा है कि गुपकार अलायंस की किसी भी बैठक में राज्य कांग्रेस का कोई प्रतिनिधि शामिल नहीं हुआ. कांग्रेस डीडीसी चुनाव अपने सिंबल पर लड़ेगी.
8. कांग्रेस पार्टी ने साफ किया है कि वह जम्मू कश्मीर में फारूक अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती वाले गठबंधन यानी ‘गुपकार अलायंस’ या ‘पीपुल्स एसोसिएशन फॉर गुपकार डिक्लरेशन’ का हिस्सा नहीं है. साथ ही कांग्रेस ने पूर्व में पीडीपी के साथ मिलकर सरकार चलाने को लेकर बीजेपी से सफाई मांगी पर है. दरअसल जम्मू कश्मीर में होने जा रहे डिस्ट्रिक्ट डेवलपमेंट कॉउंसिल के चुनाव में कांग्रेस नेशनल कांफ्रेंस के साथ समझौते के तहत चुनाव लड़ रही है. कुछ सीटों पर पीडीपी के साथ भी समझौता किया गया है.

9. कांग्रेस महासचिव और मीडिया प्रभारी रणदीप सुरजेवाला ने जवाब दिया कि ‘आए दिन झूठ बोलना और नए भ्रमजाल गढ़ना मोदी सरकार का चाल, चेहरा और चरित्र बन गया है. शर्म की बात तो यह है कि गृहमंत्री अमित शाह राष्ट्रीय सुरक्षा की अपनी जिम्मेदारी को दरकिनार कर जम्मू, कश्मीर व लद्दाख पर सरासर झूठी, भ्रामक व शरारतपूर्ण बयानबाजी कर रहे हैं’.

10. गुपकार घोषणा में यह कहा गया, ‘हम आर्टिकल 370 और आर्टिकल 35ए, जम्मू-कश्मीर के संविधान, इसके राज्य के दर्जे की वापसी के लिए साझी लड़ाई को लेकर समर्पित हैं। हमें राज्य के बंटवारा बिल्कुल नामंजूर है. हम सर्वसम्मति से यह दोहराते हैं कि हमारी एकता के बिना हमारा कुछ नहीं हो सकता।’ इसमें आगे कहा गया, ‘5 अगस्त, 2019 को लिए गए फैसले असंवैधानिक थे जिनका मकसद जम्मू-कश्मीर को अधिकारों से वंचित करना और वहां के लोगों की मूल पहचान को चुनौती देना है.

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