Wednesday, July 6, 2022
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एलोरा कैलाश मंदिर का निर्माण किस वंश ने किया था ?

एलोरा कैलाश मंदिर का निर्माण किस वंश ने किया था ?कैलाश मंदिर राष्ट्रकूट राजा कृष्ण प्रथम ने (756AD-773AD) के दौरान बनवाया था
मंदिर या भवन को बनाते समय पत्थरों के टुकड़ों को एक के ऊपर एक जमाते हुए बनाया जाता है.कैलाश मंदिरबनाने में एकदम अनोखा ही तरीका अपनाया गया. यह मंदिर एक पहाड़ के शीर्ष को ऊपर से नीचे काटते हुए बनाया गया है !

पत्थर काट-काट कर खोखला करके मंदिर, खम्बे, द्वार, नक्काशी आदि बनाई गयीआज के वैज्ञानिक और शोधकर्ता अनुमान लगाते हैं कि मंदिर बनाने के दौरान करीब 4,00,000 टन पत्थर काट कर हटाया गया होगा.

इस हिसाब से अगर 7,000 मजदूर 150 वर्ष तक काम करें तभी यह मंदिर पूरा बना होगा, लेकिन बताया जाता है कि Kailash Mandir इससे काफी कम समय महज 17 वर्ष में ही बनकर तैयार हो गया था.माना जाता है कि कैलाश मंदिर राष्ट्रकूट राजा कृष्ण प्रथम ने (756AD-773AD) के दौरान बनवाया था.

इसके अतिरिक्त इस मंदिर को बनाने का उद्देश्य, बनाने की टेक्नोलॉजी, बनाने वाले का नाम जैसी कोई भी जानकारी उपलब्ध नहीं है. मंदिर की दीवारों पर उत्कीर्ण लेख बहुत पुराना हो चुका है एवं लिखी गयी भाषा को कोई पढ़ नहींमंदिर का स्थापत्यद्रविड़ शैली के मंदिर का रूप दिया गया है। अपनी समग्रता में 276फीट लम्बा , 154 फीट चौड़ा यह मंदिर केवल एक चट्टान को काटकर बनाया गया है। 90 फुट ऊँचा मंदिर गढ़ा गया है। मंदिर भीतर बाहर चारों ओर मूर्ति-अलंकरणों से भरा हुआ है। इस मंदिर के आँगन के तीन ओर कोठरियों की पाँत थी जो एक सेतु द्वारा मंदिर के ऊपरी खंड से संयुक्त थी। अब यह सेतु गिर गया है।भगवान शिव को समर्पित इस विशाल मंदिर का निर्माण 8 वीं शताब्दी में राष्ट्रकूट राजा कृष्ण 1 द्वारा करवाया गया था।

Manju Lata Shukla

लेकिन कैलास मंदिर के कई प्रतीक जैसे देवताओं की मूर्तियां, खंभे और जानवरों की आकृतियां किसी अज्ञात अतीत की ओर इशारा करती हैं।माना जाता है इनका निर्माण 5वीं और 10 वीं शताब्दी के आसपास किया गया कैलास मंदिर उन 34 मठों और मंदिरों में से एक है जो एलोरा गुफाओं को एक अद्भुत रूप प्रदान करते हैं। जिन्हें सह्याद्री पहाड़ियों की बेसाल्ट चट्टान की दीवारों के किनारे लगभग 2 किमी के क्षेत्र में खोदकर बनाया गया है। । जहां वास्तुकला और मूर्तिकला द्रविड़ शैली से प्रभावित लगते हैं।कैलास मंदिर परिसर में बनाए गए विशालकाय हाथी भारतीय वास्तुकला का अद्भुत नमूना माने जाते हैं। जो यहां आने वाले सैलानियों को अपनी ओर ज्यादा आकर्षित करते हैं।

(लेखक रसायन शास्त्र में परास्नातक की छात्रा है तथा धार्मिक मामलो की जानकार है)

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