Monday, January 17, 2022
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यूपीए को लेकर राउत-पाटोले में कहासुनी तेज

मुंबई/विनय सिंह
राज्य की महा विकास आघाडी सरकार में शामिल शिवसेना के नेता संजय राउत और कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष नाना पटोले के बीच कहासुनी का दौर तीसरे दिन भी लगातार जारी है। बता दें कि जब से संजय राउत ने यूपीए का नेतृत्व शरद पवार को देने की मांग उठाई है। महाराष्ट्र कांग्रेस के नेता खासकर महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष नाना पटोले खासे आक्रामक हैं। दोनों के बीच इस मुद्दे पर पिछले दो-तीन दिन से लगातार आरोप-प्रत्यारोप चल रहे हैं।

कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष नाना पटोले

कांग्रेस की नाराजगी की परवाह किए बिना संजय राउत ने शुक्रवार को कहा कि दिल्ली में कुछ लोग यूपीए-2 बनाने की तैयारी कर रहे हैं, इसलिए अगर विपक्ष बीजेपी से लड़ना चाहता है, तो मौजूदा यूपीए को मजबूत होने की जरूरत है। राउत ने कहा कि तीसरा, चौथा या पांचवां मोर्चा बनाने का नाटक विफल हो गया है इसलिए मौजूदा यूपीए को मजबूत होने की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि दिल्ली में कुछ लोग यूपीए-2 बनाने की तैयारी कर रहे हैं। इसलिए मैं यह कह रहा हूं कि यूपीए-1 को मजबूत होना होगा। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया ये लोग कौन हैं जो यूपीए-2 बनाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर संप्रग-2 बना तो मौजूदा संप्रग की महत्ता कम होगी और फिर विपक्षी पार्टियों के हाथ में कुछ नहीं होगा।

बता दें कि पवार को यूपीए का नेता बनाने के राउत के सुझाव पर महाराष्ट्र कांग्रेस नेताओं ने गुरुवार को कहा था शिवसेना नेता से ऐसी टिप्पणियां करने से बचना चाहिए क्योंकि शिवसेना तो यूपीए का हिस्सा भी नहीं है।

महाराष्ट्र कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष नाना पटोले ने राउत से पूछा था कि क्या वह पवार के प्रवक्ता हैं?, इस पर राउता ने जवाब दिया कि शरद पवार देश के नेता हैं। सभी जानते हैं कि शरद पवार या उद्धव ठाकरे क्या हैं। राउत ने कहा कि इसके बारे में बोलने के लिए किसी को यूपीए का हिस्सा बनने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि संप्रग का मुद्दा किसी राज्य का नहीं बल्कि देश का मुद्दा है। इसलिए राज्य के लोगों को इसके बारे में नहीं बोलना चाहिए। राउत ने यह भी कहा कि अगर विपक्षी पार्टियां बीजेपी का मुकाबला करना चाहती है, तो गठबंधन को मजबूत करने पर चर्चा करने की आवश्यकता है।

चुनाव आते ही कैसे कम हो जाते हैं पेट्रोल-डीजल के दाम: शिवसेना
हर दिन बढ़ने वाले पेट्रोल डीजल के दाम देशभर में कहीं भी चुनाव होने पर अचानक कम कैसे हो जाते हैं यह सवाल उठाया है शिवसेना ने। शिवसेना ने शुक्रवार को बिना नाम लिए केन्द्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि उसने शायद पश्चिम बंगाल सहित पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव के मद्देनजर तेल के दाम कम किए हैं ताकी ईंधन की बढ़ती कीमतों का खामियाजा बीजेपी को ना उठाना पड़े।

बता दें कि कई हफ्तों की तेजी के बाद गुरुवार को पेट्रोल 21 पैसे प्रति लीटर और डीजल 20 पैसे प्रति लीटर सस्ता हुआ है। शिवसेना ने आरोप लगाया है कि शायद केंद्र ने तेल की कीमत, इसलिए कम की है ताकि बीजेपी को असम और पश्चिम बंगाल सहित पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव में तेल की बढ़ती कीमतों का खामियाजा ना उठाना पड़े। पार्टी ने कहा कि यकीनन हमें, आम लोगों को नहीं भूलना चाहिए, इसका हिसाब फिर कभी बराबर किया जाएगा। शिवसेना ने मूल्य वृद्धि का विरोध के बावजूद केंद्र पर पेट्रोल तथा डीजल की कीमत कम करने की इच्छाशक्ति नहीं दिखाने का भी आरोप लगाया।

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