अफगानिस्तान में हिंसा के खिलाफ दुनिया, भारत ने दिया शांति का ये तीन सूत्रीय उपाय

भारत ने कहा है कि अफगानिस्तान में हिंसा (Afghanistan Violence) का पूर्ण समापन करना होगा, राजनीतिक बातचीत के जरिए मुद्दों को सुलझाना होगा और ये भी सुनिश्चित करना होगा कि आतंकी गतिविधियों से पड़ोसी देशों पर कोई असर न पड़े.

भारतीय विदेश मंत्री जयशंकर . (फाइल फोटो )

नई दिल्ली. अफगानिस्तान (Afghanistan) एक बार तालिबानी हिंसा (Taliban Violence) की चपेट में आ चुका है. आतंकी संगठन ने देश के बड़े हिस्सा पर हिंसा के बलबूते कब्जा कर लिया है जिसे लेकर पूरी दुनिया में चिंता जताई जा रही है. अब भारत ने अफगानिस्तान को इस स्थिति से बाहर निकालने के लिए तीन सूत्रीय फॉर्मूला दिया है.

ताजिकिस्तान की राजधानी दुशांबे में शंघाई कॉरपोरेशन की बैठक के दौरान भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अफगानिस्तान हिंसा पर तीन सूत्रीय फॉर्मूला दिया है. भारत ने कहा है कि अफगानिस्तान में हिंसा का पूर्ण समापन करना होगा, राजनीतिक बातचीत के जरिए मुद्दों को सुलझाना होगा और ये भी सुनिश्चित करना होगा कि आतंकी गतिविधियों से पड़ोसी देशों पर कोई असर न पड़े.

SCO की बैठक में मौजूद रहे चीनी, रूसी, पाकिस्तानी और अफगानिस्तानी विदेश मंत्री
इस बैठक में विदेश मंत्री एस. जयशंकर के अलावा उनके चीनी, रूसी, पाकिस्तानी और अफगानिस्तानी समकक्ष मौजूद थे. इससे पहले भारत में अफगानिस्‍तान के राजदूत ने कहा है कि भविष्‍य में अगर तालिबान से वार्ता विफल रहती है तो उनका देश भारतीय सेना से मदद मांग सकता है. हालांकि उन्‍होंने यह भी साफ किया है कि यह मदद सेना को अफगानिस्‍तान बुलाने के रूप में नहीं बल्कि ट्रेनिंग और तकनीकी सहायता के रूप में ली जाएगी.

इस समय तालिबान ने अफगानिस्‍तान के अधिकांश इलाकों पर कब्‍जा करना शुरू कर दिया है. ऐसे में सरकार और तालिबान के प्रतिनिधियों के बीच वार्ता चल रही है. हालांकि माना जाता है कि दोहा में हो रही शांति वार्ता काफी हद तक विफल हो गई है और तालिबान अब पूरी तरह से सैन्य जीत के लिए तैयार है.

‘भारत से मांग सकते हैं मदद’
अफगानिस्‍तान के राजदूत फरीद मामुंदज़े ने मीडिया से कहा है, ‘अगर हम तालिबान के साथ शांति प्रक्रिया में सफल नहीं होते हैं, तो हो सकता है कि हम भारतीय सेना की मदद मांगें.’ वह चाहते हैं कि भारत में उनके पायलटों को ट्रेनिंग दी जाए