Monday, August 8, 2022
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सुप्रीम कोर्ट को इस तरह की टिप्पणी करने का कोई अधिकार नहीं है: जस्टिस ढींगरा

  • सुप्रीम कोर्ट को इस तरह की टिप्पणी करने का कोई अधिकार नहीं है: जस्टिस ढींगरा
  • जस्टिस ढींगरा ने कहा कि इससे नूपुर के खिलाफ सभी अदालतें पूर्वाग्रहित हो सकती हैं।
  • सुप्रीम कोर्ट ने नूपुर शर्मा की याचिका नामंजूर करते हुए बेहद कड़ी टिप्पणी की थी।
जस्टिस एस. एन. ढींगरा

Nupur Sharma Case: दिल्ली हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस एस. एन. ढींगरा ने नूपुर शर्मा पर सुप्रीम कोर्ट के ऑब्जर्वेशन को ‘गैरजिम्मेदाराना’, गैरकानूनी’ और ‘अनुचितबताया है। एक टीवी चैनल को दिए एक इंटरव्यू में जस्टिस ढींगरा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट को ऐसी टिप्पणी करने का कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने एक तरह से नूपुर शर्मा को बिना सुने उनके ऊपर चार्ज भी लगा दिया और फैसला भी दे दिया। जस्टिस ढींकरा ने कहा कि किसी भी दृष्टिकोण से सुप्रीम कोर्ट को ऐसी टिप्पणी करने का कोई अधिकार नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट को कोई अधिकार नहीं है कि…’

एक टीवी चैनल के एक सवाल पर जस्टिस ढींगरा ने कहा, ‘मेरे हिसाब से यह टिप्पणी अपने आप में बहुत गैर-जिम्मेदाराना है। सुप्रीम कोर्ट को कोई अधिकार नहीं है कि वह इस प्रकार की कोई टिप्पणी करे जिससे जो व्यक्ति उससे न्याय मांगने आया है उसका पूरा करियर चौपट हो जाए या उसके खिलाफ सभी अदालतें पूर्वाग्रहित हो जाएं। सुप्रीम कोर्ट ने एक प्रकार से नूपुर शर्मा को बिना सुने उनके ऊपर चार्ज भी लगा दिया और फैसला भी दे दिया। न तो गवाही हुई, न जांच हुई और न ही उन्हें कोई मौका दिया कि वह अपनी सफाई पेश कर सकें।

सुप्रीम कोर्ट ने नूपुर शर्मा को लगाई थी कड़ी फटकार
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने नुपुर शर्मा की पैगंबर मोहम्मद के बारे में विवादित टिप्पणी को लेकर उन्हें शुक्रवार को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि उनकी ‘बेलगाम जुबान’ ने पूरे देश को आग में झोंक दिया। कोर्ट ने यह भी कहा कि ‘देश में जो कुछ हो रहा है उसके लिए शर्मा अकेले जिम्मेदार हैं।’ कोर्ट ने शर्मा की विवादित टिप्पणी को लेकर विभिन्न राज्यों में दर्ज प्राथमिकियों को एक साथ जोड़ने संबंधी उनकी अर्जी स्वीकार करने से इनकार कर दिया था। कोर्ट ने कहा था कि नूपुर ने पैगंबर मोहम्मद के बारे में टिप्पणी या तो सस्ता प्रचार पाने के लिए या किसी राजनीतिक एजेंडे के तहत या किसी घृणित गतिविधि के तहत की।

‘सर्वोच्च न्यायालय भी कानून से ऊपर नहीं है’
यह पूछे जाने पर कि सुप्रीम कोर्ट के ऑब्जर्वेशन पर सवाल उठ रहे हैं, जस्टिस ढींगरा ने कहा, ‘सर्वोच्च न्यायालय भी कानून से ऊपर नहीं है। कानून यह कहता है कि यदि किसी शख्स को आप दोषी ठहराना चाहते हैं तो आपको सबसे पहले उसके ऊपर चार्ज फ्रेम करना होगा, इसके बाद प्रॉसिक्यूशन अपने साक्ष्य प्रस्तुत करेगी, इसके बाद उसे मौका मिलेगा कि वह उन साक्ष्यों के ऊपर अपना बयान दे। उसके बाद उसे अपने गवाह पेश करने का मौका मिलता है। उसके बाद अदालत का कर्तव्य है कि वह सभी साक्ष्यों को ध्यान में रखकर अपना फैसला दे।

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