Monday, January 17, 2022
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सीता-राम विवाहोत्सव :दिन ढलते ही रामनगरी के क्षितिज पर रोशन हुआ आस्था का सूर्य

अयोध्या [रघुवरशरण]। प्रत्येक वर्ष अगहन शुक्ल पक्ष पंचमी की तिथि को मनाये जाने वाले सीता-राम विवाहोत्सव के साथ रामनगरी की आस्था फलक पर होती है। इस बार रामजन्मभूमि पर भव्य-दिव्य मंदिर निर्माण की तैयारियों के साथ आस्था का यह रंग कुछ अधिक चमक के साथ प्रस्तुत हुआ। हालांकि, दिन ढलने के साथ शनिवार का सूर्य अस्त हो चुका था, पर आस्था का सूर्य पूरी भव्यता से रामनगरी के क्षितिज पर रोशन हुआ। 

बरातियों का हुआ स्वागत

रामकोट वार्ड के पार्षद पुजारी रमेशदास एवं समाजसेवी विकास श्रीवास्तव के संयोजन में राम बरात में शामिल संतों एवं श्रद्धालुओं का स्वागत किया गया। 

राम विवाहोत्सव की रौनक नगरी में सप्ताह भर पूर्व से ही व्याप्त है। अवध एवं मिथिला की संस्कृति के अनुरूप कहीं विवाह की रस्म संपादित हो रही है, तो कहीं राम विवाह पर केंद्रित लीला की प्रस्तुति एवं प्रवचन की रसधार प्रवाहित हो रही है। शनिवार को ऐन विवाहोत्सव के दिन उत्सव का शिखर परिलक्षित हुआ। यूं तो नगरी के शताधिक मंदिर विवाहोत्सव की सरगर्मी के साक्षी हैं, पर कुछ मंदिरों के उत्सव भव्यता के पर्याय हैं। 

रामभक्तों की शीर्ष पीठ कनकभवन, इसी से कुछ फासले पर स्थित दशरथमहल बड़ास्थान, रंगमहल, मणिरामदास जी की छावनी, रामवल्लभाकुंज, जानकीमहल, अमावा राम मंदिर, लक्ष्मणकिला, हनुमानबाग, रामहर्षणकुंज, विअहुतीभवन, सियारामकिला, रसमोदकुंज आदि इसी कोटि के मंदिर हैं। इन मंदिरों में शनिवार को न केवल विवाहोत्सव से जुड़ी रस्मों का निष्पादन पूर्णता की ओर बढ़ा, बल्कि श्रद्धालुओं के सैलाब से अभिषिक्त होने के साथ उत्सव का वैशिष्ट्य भी परिभाषित हुआ। दिन ढलने के कुछ ही देर बाद करीब दर्जन भर मंदिरों से राम बरात का प्रस्थान होते ही उत्सव का उल्लास आसमान छूता प्रतीत हुआ। 

मान्यता के अनुसार त्रेता में जहां राजा दशरथ का महल था, आचार्य पीठ दशरथमहल बड़ास्थान उसी स्थल पर स्थापित है और विरासत के अनुरूप इस स्थल से अयोध्या की प्रतिनिधि राम बरात निकली। राजसी वैभव के अनुरूप पूरे ठाट-बाट से। पालकी पर विराजे आराध्य विग्रह, बैंड की धुन, पताकाधारी श्रद्धालुओं की बड़ी पांत और हाथी-घोड़ों से सज्जित बरात त्रेतायुगीन वह परिदृश्य उपस्थित कर रही थी, जब अयोध्या से जनकपुर के लिए बरात का प्रस्थान हुआ होगा। कनकभवन में सायं पट खुलने के साथ भगवान राम के विग्रह पर सज्जित मौर तथा सीता के विग्रह पर मौरी दर्शनार्थियों को उत्सव की भावधारा से भिगो रही थी।

मनायी गयी राम रसोई की वर्षगांठ 

रामलला के दर्शन मार्ग पर स्थित अमावा राम मंदिर में राम रसोई की प्रथम वर्षगांठ मनायी गयी। इस मंदिर में गत वर्ष रामलला के हक में आये सुप्रीम फैसले के बाद राम विवाहोत्सव के दिन ही रामलला के दर्शनार्थियों के लिए राम रसोई की शुरूआत की गयी थी। राम रसोई के संचालक पूर्व आईपीएस अधिकारी आचार्य किशोर कुणाल ने रामभक्तों की विशाल पांत को भोजन परोस राम रसोई की वर्षगांठ का उत्सव मनाया। राम रसोई में फिलहाल, रामलला के औसतन एक हजार दर्शनार्थी नित्य भोजन करते हैं, पर जरूरत के हिसाब से आचार्य कुणाल 10 हजार दर्शनार्थियों को भी नित्य मुफ्त भोजन कराने की तैयारी में हैं। आचार्य कुणाल अमावा राम मंदिर का प्रबंधन देखने वाली संस्था निखिल भारतीय तीर्थ विकास समिति के साथ पटना स्थित सुप्रसिद्ध महावीर मंदिर ट्रस्ट के भी सचिव हैं और राम रसोई के लिए महावीर मंदिर ट्रस्ट की ही ओर से सालाना तीन करोड़ 20 लाख रुपये का बजट तय किया गया है, जरूरत के हिसाब से बजट में वृद्धि भी की जा सकती है। वर्षगांठ के मौके पर तय किया गया कि राम रसोई में श्रद्धालुओं को 11 प्रकार के व्यंजन परोसे जायेंगे। अभी तक राम रसोई में श्रद्धालुओं को नौ प्रकार के व्यंजन परोसे जाते थे। 

उत्सव ही नहीं अनुष्ठान भी

सीता-राम विवाहोत्सव लोकरंजक उत्सव ही नहीं साधकों-संतों के लिए गहन-गंभीर अनुष्ठान भी है। यह सच्चाई आचार्य पीठ दशरथमहल में बयां हुई। बरात प्रस्थान से पूर्व पालकी तक आराध्य विग्रह वैदिक मंत्रोच्चार के साथ ले जाए गए। दशरथमहल पीठाधीश्वर बिंदुगाद्याचार्य देवेंद्रप्रसादाचार्य समर्पित अनुरागी की भांति पूरी त्वरा से आराध्य विग्रह को चंवर डुलाते हुए गर्भगृह से पालकी तक पहुंचे। यह तत्परता स्पष्ट करते हुए बिंदुगाद्याचार्य ने बताया, सीता-राम विवाहोत्सव हमारे लिए मात्र अतीत की स्मृति ही नहीं है बल्कि इस आयोजन से हम अखिल ब्रह्मांड के अधिष्ठाता राम और अधिष्ठात्री सीता के बीच समन्वय के सूत्र से अपने जीवन को सम्यक-सारगर्भित बनाते हैं। उत्सव में निहित इसी चेतना के साथ बिंदुगाद्याचार्य के कृपापात्र रामभूषणदास कृपालु भव्यता सुनिश्चित करने के लिए बरात के विभिन्न अंगों-उपांगों के पेंच कस रहे होते हैं। 

प्रदेश भाजपाध्यक्ष ने भी अर्पित की आस्था

रंगमहल के राम विवाहोत्सव की रसधार में प्रदेश भाजपाध्यक्ष स्वतंत्रदेव सिंह ने भी डुबकी लगायी। रंगमहल मधुर उपासना परंपरा की चुनिंदा पीठों में शुमार है। मंदिर की स्थापना महान रसिक संत सरयूशरण ने दो सौ वर्ष पूर्व की थी, तभी से यहां का राम विवाहोत्सव भक्तों के लिए लुभावन रहा है। वर्तमान महंत रामशरणदास के संयोजन में भी रंगमहल की यह विरासत अक्षुण्ण है। विवाह की रस्म के साथ देरशाम रंगमहल से मनोहारी राम बरात भी निकली।

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