नवरात्र शक्ति का पूजन है:संस्कारों का जन्म ही मातृत्व शक्ति से होता है…

नवरात्र शक्ति का पूजन है। यह नारी शक्ति, उसके आभामंडल के आदर का उत्सव है। भारतीय संस्कृति में मातृत्व शक्ति के विराट स्वरूप का वर्णन है। किसी भी धार्मिक अनुष्ठान का प्रारंभ कन्या के शुभ हाथों से, तो पहला चरण-वंदन मां का करने की परंपरा है। संस्कारों का जन्म ही मातृत्व शक्ति से होता है।

मंजू लता शुक्ला

मां अपनी कोख में और जन्म देने के बाद बच्चे को जो संस्कार देती है, इसी पर परिवार, समाज और देश का भविष्य टिका होता है। मां बच्चे को एक पुरुष के रूप में संसार का संचालन करने की शक्ति प्रदान करती है। मातृत्व शक्ति चाहे, तो एक पीढ़ी में संपूर्ण मानव सभ्यता को बदल सकती है। एक परिपक्व व्यक्तित्व को गढ़ने में मां की शक्ति की अहम भूमिका होती है।
अब तो विज्ञान ने भी साबित कर दिया है कि मातृत्व शक्ति एक सकारात्मक शक्ति है। इस सकारात्मक शक्ति की अनदेखी मातृत्व और कन्या शक्ति, दोनों को कमजोर करती है। सरस्वती, लक्ष्मी और दुर्गा ये क्रमश: ज्ञान, धन और शक्ति की देवी हैं। इनकी स्तुति में संपूर्ण कल्याण छिपा है। यदि मन, वचन, कर्म और समस्त इंद्रियों द्वारा इन तीनों शक्तियों का सदुपयोग किया जाए, तो ये परिवार, समाज और देश में संस्कार, संस्कृति और धर्म को जीवंत बनाने में समर्थ हैं। इनकी कृपा से मनुष्य मात्र को नई ऊर्जा, नई दिशा और नई गति मिलती है।


राम-कथा में देवी सीता नारी सशक्तीकरण का सबसे प्रेरणादायी उदाहरण हैं। उन्होंने कभी अपनी शक्ति का अहंकार नहीं किया। वह राम की शक्ति तो हैं ही, उनके अपूर्व साहस, बल, धैर्य, मातृत्व आदि गुणों से प्रेरणा ग्रहण करने की आवश्यकता है। सीता ने कन्या शक्ति और मातृत्व शक्ति, दोनों का सदुपयोग किया, मानसिक रूप से तो वह इतनी सबल रहीं कि उनका नाम राम के पहले लिया जाता है। 
आज मातृत्व शक्ति कमजोर दिखाई दे रही है, तो उसकी मूल वजह यह है कि स्वयं माएं अपने बच्चों को संस्कार, संस्कृति और धर्म से जोड़ नहीं पा रही हैं। मातृत्व शक्ति प्रेम और वात्सल्य का सर्वश्रेष्ठ प्रतीक है।

आज एक-दूसरे के प्रति प्रेम, वात्सल्य इसलिए भी समाप्त हो रहा है, क्योंकि माओं ने अपनी शक्ति को संभालकर नहीं रखा। सीता जैसा आत्मविश्वास और धैर्य अब उनमें दिखाई नहीं दे रहा। मातृत्व शक्ति को सहेजने और सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी स्वयं लेनी पड़ती है। एक बात हमेशा याद रखिए, धर्म को सुरक्षित रखने के लिए व्यापार से अधिक संस्कार को सुरक्षित रखना जरूरी है। ऐसे में, मातृत्व शक्ति को आज सही दिशा में लगाने की आवश्यकता है। मातृत्व शक्ति परीक्षाओं की अग्नि से गुजरकर ही अपने को स्थापित करती रही है।

(लेखक धार्मिक मामलो की जानकार एवं रष्ट्रीय विचारक है )