Thursday, July 7, 2022
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नारायण नारायण मायापति नाराय आखिर क्या है गोवर्धन  ️पर्वत का रहस्य

आखिर क्या है गोवर्धन  ️पर्वत का रहस्य
नारायण नारायण मायापति नाराय आखिर क्या है गोवर्धन  ️पर्वत का रहस्य*
नारायण नारायण मायापति नारायण

गोवर्धन पर्वत का इतिहास बहुत ही पुराना है और ग्रंथों के अनुसार यहां जाने से मिट जाता है गौहत्या का पाप, पढ़िए इसका रहस्य।
मथुरा। जिले से करीब 22 किलोमीटर दूर गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा का बड़ा महत्व है। मथुरा में स्थित गोवर्धन पर्वत उत्तर प्रदेश के एक जिले के अंतर्गत नगर पंचायत है।
 *गोवर्धन पर्वत व इसके आसपास के क्षेत्र को लोग ब्रज भूमि भी कहते हैं । यह भगवान श्री कृष्ण की लीलास्थली है। यहीं पर भगवान श्री कृष्ण ने द्वापर युग में ब्रजवासियों को इन्द्र के प्रकोप से बचाने के लिये गोवर्धन पर्वत को अपनी तर्जनी अंगुली पर उठाया था।*
 *गोवर्धन पर्वत को भक्क्तजन गिरिराज जी भी कहते हैं। दूर—दूर से लोग इस पर्वत की परिक्रमा लगाने आते हैं। कहा जाता है कि इस गोवर्धन पर्वत का आकार हर दिन मुट्ठीभर घट जाता है।*
*माना जाता है की करीब पांच हजार साल पहले ये पर्वत 30 हजार मीटर ऊंचा हुआ करता था लेकिन आज लगभग 30 मीटर का ही रह गया है।* 
*यूपी घूमो कैंपेन के तहत आज हम आपको बताएंगे कि क्या है गोवर्धन पर्वत के घटने का राज, इसकी परिक्रमा के दौरान किन—किन मंदिरों के दर्शन होते हैं? और क्या है उनकी मान्यता है :-*
*⛰️गोवर्धन पर्वत का आकार* *घटने के पीछे ये है मान्यता⛰️*
*बेहद पुराने इस गिरिराज पर्वत  को लेकर माना जाता है कि इस पर्वत की खूबसूरती से पुलस्त्य ऋषि बहुत प्रभावित हुए। उन्होंने द्रोणांचल पर्वत से इसे उठाकर साथ लाना चाहा तो गिरिराज जी ने कहा कि आप मुझे जहां भी पहली बार रखेंगे मैं वहीं स्थापित हो जाउंगा। रास्ते में साधना के लिए ऋषि ने पर्वत को नीचे रख दिया फिर वे दोबारा उसे हिला नहीं सके। इससे क्रोध में आकर उन्होंने पर्वत को शाप दे दिया कि वह रोज घटता जाएगा। माना जाता है उसी समय से गोवर्धन पर्वत का कद लगातार घट रहा है।*
*5 किलोमीटर के बाद बदल जाता है राज्य*
*जिस स्थान से गोवर्धन की परिक्रमा शरू करते है वहां से करीब 5 किलोमीटर चलने के बाद राजस्थान की सीमा शरू हो जाती है। गोवर्धन पर्वत करीब 10 किलोमीटर के क्षेत्रफल में फैला हुआ है जिसका आधा हिस्सा राजस्थान और आधा हिस्सा उत्तर प्रदेश राज्य में पड़ता है। इस सीमा के मध्य में दुर्गा माता का मंदिर भी है। यहां से कुछ ही दूरी पर स्थित है पूछरी का लोंठा, यह स्थान बेहद पुराना है, इस स्थान को राजस्थान छतरी भी कहा जाता है। सदियों से यहाँ दूर-दूर से भक्तजन गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा करने आते रहते हैं। यह 7 कोस की परिक्रमा लगभग 21 किलोमीटर की है। इस मार्ग में पड़ने वाले प्रमुख स्थल आन्यौर, राधाकुंड, कुसुम सरोवर, मानसी गंगा, गोविन्द कुंड, पूंछरी का लोटा, दानघाटी इत्यादि भी हैं।*
*🛕हरजी कुंड🛕*
*गोवर्धन पर्वत से कुछ दूरी पर एक कुंड स्थित है जिसे हरजी कुंड कहा जाता है। इस स्थान पर भगवान श्रीकृष्ण अपने ग्वाल सखाओं के साथ गाय चराने आते थे। जब हम बड़ी परिक्रमा पूरी कर लेते है तो उसके बाद आता है चूतर टेका। यह बेहद पुराना स्थान है, यहां भगवान लक्ष्मण, भगवान राम, सीता माता और राधा-कृष्ण के मंदिर हैं।*
*ये प्रमुख मंदिर आते है गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा मार्ग पर विट्ठल नामदेव मंदिर है। फिर राधा कुंड आता है। माना जाता है कि इस कुंड को राधा ने अपने कंगन से खोदकर बनाया था।* 
*राधाकुंड और श्यामकुंड में नहाने से गौहत्या का पाप भी खत्म हो जाता है। यहां के पुजारियों ने बताया कि जब श्रीकृष्ण की हत्या करने की कंस की सारी योजनाएं विफल हो रही थीं, तब असुर अरिष्ठासुर को भेजा गया उस वक्त वह गायों को चराने के लिए गोवर्धन पर्वत पर गए हुए थे।* 
*यहां पहुंचने के बाद अरिष्ठासुर ने बैल का रूप धारण किया और गायों के साथ चलने लगा इसी दौरान श्रीकृष्ण ने अरिष्ठासुर को पहचान लिया और उसका वध कर दिया।*
*इसके बाद श्रीकृष्ण राधा के पास गए और उन्हें छू लिया। इस बात से राधारानी बेहद नाराज हुईं उन्होंने कहा- ‘गौ हत्या करने के बाद छूकर आपने मुझे भी पाप का भागीदार बना दिया। इस घटना के बाद राधा रानी ने कंगन से खोदकर कुंड की स्थापना की उन्होंने मानसी गंगा से पानी लेकर इसे भरा इसके बाद सभी तीर्थों को कुंड में आने की अनुमति हुई यहां राधा रानी और उनकी सहेलियों ने स्नान कर गौ हत्या का पाप धोया ।*
*🛕श्याम कुंड का महत्व🛕*
*श्रीकृष्ण ने गौहत्या का पाप खत्म करने के लिए छड़ी से कुंड बनाया। उन्होंने सभी तीर्थों को उसमें विराजमान किया और इसमें स्नान भी किया। पुरोहित राम नारायण ने बताया कि कार्तिक महीने की कृष्णाष्टमी के दिन यहां नहाने का अलग महत्व है।*
*🛕मानसी गंगा की मान्यता🛕*
*इस मंदिर में मानसी गंगा की प्रतिमा है और श्रीकृष्ण के स्वरूपों की भी पूजा होती है मान्यता है कि जब गोवर्धन पर्वत का अभिषेक हो रहा था, उस वक्त गंगा के लिए पानी की आवश्यकता हुई तब सभी चिंता में पड़ गए कि इतना गंगाजल कैसे लाया जाए।*
*इस दौरान भगवान ने अपने मन से गंगा को गोवर्धन पर्वत पर उतार दिया। इसके बाद से ही इसे मानसी गंगा कहते हैं। पहले यह छह किलो मीटर लंबी गंगा हुआ करती थी। अब यह कुछ ही स्थान में सिमट कर रह गई है।*
*गोवर्धन पर्वत का इतिहास बहुत ही पुराना है और ग्रंथों के अनुसार यहां जाने से मिट जाता है गौहत्या का पाप, पढ़िए इसका रहस्य।*
*मथुरा। जिले से करीब 22 किलो​मीटर दूर गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा का बड़ा महत्व है। मथुरा में स्थित गोवर्धन पर्वत उत्तर प्रदेश के एक जिले के अंतर्गत नगर पंचायत है।*
 *गोवर्धन पर्वत व इसके आसपास के क्षेत्र को लोग ब्रज भूमि भी कहते हैं । यह भगवान श्री कृष्ण की लीलास्थली है। यहीं पर भगवान श्री कृष्ण ने द्वापर युग में ब्रजवासियों को इन्द्र के प्रकोप से बचाने के लिये गोवर्धन पर्वत को अपनी तर्जनी अंगुली पर उठाया था।*
 *गोवर्धन पर्वत को भक्क्तजन गिरिराज जी भी कहते हैं। दूर—दूर से लोग इस पर्वत की परिक्रमा लगाने आते हैं। कहा जाता है कि इस गोवर्धन पर्वत का आकार हर दिन मुट्ठीभर घट जाता है।*
*माना जाता है की करीब पांच हजार साल पहले ये पर्वत 30 हजार मीटर ऊंचा हुआ करता था लेकिन आज लगभग 30 मीटर का ही रह गया है।* 
*यूपी घूमो कैंपेन के तहत आज हम आपको बताएंगे कि क्या है गोवर्धन पर्वत के घटने का राज, इसकी परिक्रमा के दौरान किन—किन मंदिरों के दर्शन होते हैं? और क्या है उनकी मान्यता है :-*
*⛰️गोवर्धन पर्वत का आकार* *घटने के पीछे ये है मान्यता⛰️*
*बेहद पुराने इस गिरिराज पर्वत  को लेकर माना जाता है कि इस पर्वत की खूबसूरती से पुलस्त्य ऋषि बहुत प्रभावित हुए। उन्होंने द्रोणांचल पर्वत से इसे उठाकर साथ लाना चाहा तो गिरिराज जी ने कहा कि आप मुझे जहां भी पहली बार रखेंगे मैं वहीं स्थापित हो जाउंगा। रास्ते में साधना के लिए ऋषि ने पर्वत को नीचे रख दिया फिर वे दोबारा उसे हिला नहीं सके। इससे क्रोध में आकर उन्होंने पर्वत को शाप दे दिया कि वह रोज घटता जाएगा। माना जाता है उसी समय से गोवर्धन पर्वत का कद लगातार घट रहा है।*
*5 किलोमीटर के बाद बदल जाता है राज्य*
*जिस स्थान से गोवर्धन की परिक्रमा शरू करते है वहां से करीब 5 किलोमीटर चलने के बाद राजस्थान की सीमा शरू हो जाती है। गोवर्धन पर्वत करीब 10 किलोमीटर के क्षेत्रफल में फैला हुआ है जिसका आधा हिस्सा राजस्थान और आधा हिस्सा उत्तर प्रदेश राज्य में पड़ता है। इस सीमा के मध्य में दुर्गा माता का मंदिर भी है। यहां से कुछ ही दूरी पर स्थित है पूछरी का लोंठा, यह स्थान बेहद पुराना है, इस स्थान को राजस्थान छतरी भी कहा जाता है। सदियों से यहाँ दूर-दूर से भक्तजन गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा करने आते रहते हैं। यह 7 कोस की परिक्रमा लगभग 21 किलोमीटर की है। इस मार्ग में पड़ने वाले प्रमुख स्थल आन्यौर, राधाकुंड, कुसुम सरोवर, मानसी गंगा, गोविन्द कुंड, पूंछरी का लोटा, दानघाटी इत्यादि भी हैं।*
*🛕हरजी कुंड🛕*
*गोवर्धन पर्वत से कुछ दूरी पर एक कुंड स्थित है जिसे हरजी कुंड कहा जाता है। इस स्थान पर भगवान श्रीकृष्ण अपने ग्वाल सखाओं के साथ गाय चराने आते थे। जब हम बड़ी परिक्रमा पूरी कर लेते है तो उसके बाद आता है चूतर टेका। यह बेहद पुराना स्थान है, यहां भगवान लक्ष्मण, भगवान राम, सीता माता और राधा-कृष्ण के मंदिर हैं।*
*ये प्रमुख मंदिर आते है गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा मार्ग पर विट्ठल नामदेव मंदिर है। फिर राधा कुंड आता है। माना जाता है कि इस कुंड को राधा ने अपने कंगन से खोदकर बनाया था।* 
*राधाकुंड और श्यामकुंड में नहाने से गौहत्या का पाप भी खत्म हो जाता है। यहां के पुजारियों ने बताया कि जब श्रीकृष्ण की हत्या करने की कंस की सारी योजनाएं विफल हो रही थीं, तब असुर अरिष्ठासुर को भेजा गया उस वक्त वह गायों को चराने के लिए गोवर्धन पर्वत पर गए हुए थे।* 
*यहां पहुंचने के बाद अरिष्ठासुर ने बैल का रूप धारण किया और गायों के साथ चलने लगा इसी दौरान श्रीकृष्ण ने अरिष्ठासुर को पहचान लिया और उसका वध कर दिया।*
*इसके बाद श्रीकृष्ण राधा के पास गए और उन्हें छू लिया। इस बात से राधारानी बेहद नाराज हुईं उन्होंने कहा- ‘गौ हत्या करने के बाद छूकर आपने मुझे भी पाप का भागीदार बना दिया। इस घटना के बाद राधा रानी ने कंगन से खोदकर कुंड की स्थापना की उन्होंने मानसी गंगा से पानी लेकर इसे भरा इसके बाद सभी तीर्थों को कुंड में आने की अनुमति हुई यहां राधा रानी और उनकी सहेलियों ने स्नान कर गौ हत्या का पाप धोया ।*
*🛕श्याम कुंड का महत्व🛕*
*श्रीकृष्ण ने गौहत्या का पाप खत्म करने के लिए छड़ी से कुंड बनाया। उन्होंने सभी तीर्थों को उसमें विराजमान किया और इसमें स्नान भी किया। पुरोहित राम नारायण ने बताया कि कार्तिक महीने की कृष्णाष्टमी के दिन यहां नहाने का अलग महत्व है।*
*🛕मानसी गंगा की मान्यता🛕*
*इस मंदिर में मानसी गंगा की प्रतिमा है और श्रीकृष्ण के स्वरूपों की भी पूजा होती है मान्यता है कि जब गोवर्धन पर्वत का अभिषेक हो रहा था, उस वक्त गंगा के लिए पानी की आवश्यकता हुई तब सभी चिंता में पड़ गए कि इतना गंगाजल कैसे लाया जाए।*
*इस दौरान भगवान ने अपने मन से गंगा को गोवर्धन पर्वत पर उतार दिया। इसके बाद से ही इसे मानसी गंगा कहते हैं। पहले यह छह किलो मीटर लंबी गंगा हुआ करती थी। अब यह कुछ ही स्थान में सिमट कर रह गई है।*

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