Monday, January 17, 2022
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महाराष्ट्र: रिटर्न आफ़ BJP बंगाल में पहली बार कमल खिलेगा..?




मुंबई से कोलकता करीब 2000 किलोमीटर दूर है और दोनों शहरों की संयुक्त आबादी करीब सात करोड़ हैअर्थात देश के बहुत सारे राज्यों से अधिक राजस्थान जैसे बड़े राज्य से भी अधिक लेकिन दोनों राज्यों में एक बात कॉमन है।

हिंदुओं और मंदिरों पर हमले पकिस्स्तातान एव इस्लामिक कट्टरपंथिता का दोहरा चरित्र दोनों राज्यों में अभी गैर भाजपा दलों की सरकारे है, हालांकि बंगाल में बीजेपी अब सत्ता पाने की पूरी दावेदार हैं और महाराष्ट्र में  भी वो सबसे अधिक विधायकों और मुख्यमंत्री उद्धव ठीकरा की पार्टी शिवसेना से करीब दुगुने एमएलए है। शिवसेना के 56 एमएलए की तुलना में बीजेपी के 110 एमएलए है।
खैर मुद्दा यह है कि दोनों राज्यों में अभी कानून और संविधान का कोई राज नहीं है। दोनों ही राज्यों में संविधान का खुल्लमखुल्ला उल्लंघन किया जा रहा है। जहाँ देश की औद्योगिक राजधानी महाराष्ट्र में ट्रांसपोर्ट पोस्टिंग में रिश्वत, मंत्रियों और अधिकारियों द्वारा खुलेआम गुंडों और मवालियो की तरह वसूली और आतंकवादियो जैसे सचिन बाजे जैसे लोगों को बेशर्मी की हद तक सरकार  के मुखिया द्वारा ही सरंक्षण और खुद पुलिस के DGP स्तर के अधिकारी द्वारा गृह मंत्री पर वसूली के संगीन आरोप है। वंही दूसरी ओर बंगाल में बांग्लादेशी धुसपैढियो को वोट बैंक के लिए खुला तुष्टीकरण।
*बंगाल में तो यह हालत हो गई है कि वंहा की चुनी हुई लेकिन मानसिक रूप से विक्षिप्त मुख्यमंत्री किसी व्यक्ति को जय श्री राम बोलने पर चमड़े के बैल्ट से पीटने के लिए कार से नीचे उतर जाती है।*
भले ही महाराष्ट्र में सत्तारुढ़ गठबंधन के पास बहुमत के लिए आवश्यक नंबर हो, लेकिन वंहा संविधानिक व्यव्स्था पूरी तरह से चरमराई हुई है। देश में कोरोना के करीब 70 प्रतिशत मामले केवल महाराष्ट्र से आ रहे हैं और देश के कुल सक्रिय केस में से 70 प्रतिशत केस केवल उद्धव ठीकरा के कुप्रबंधन से उसके राज्य में है। *होंगे भी ना, पूरी सरकार तो वसूली में लगी हुई है।*
दूसरी ओर बंगाल में परिवर्तन बहुत जरूरी है।गृह मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार करीब 2 करोड़ बांग्लादेशी बंगाल में वैध या अवैध रूप से रह रहे हैं और राज्य के सीमित संसाधनो का बुरी तरह से दोहन कर रहे हैंचूंकि वे ममता बनर्जी के वोटर है, इसलिए ममता बनर्जी भी उन्हें हर संभव मदद कर रही है और हिन्दुओं के साथ बंगाल में बहुत बुरा सुलूक हो रहा है। बंगाल में करीब पांच हजार गांवों में तो हिन्दूओं का एक भी घर नहीं है।

दोनों राज्यों की संयुक्त जनसंख्या करीब बीस करोड़ है और बीस करोड़ लोगों का नेतृत्व वे लोग कर रहे हैं, जिनका देश के संविधान पर कोई आस्था दिख नहीं रही है और वे ऐसे शासन चला रहे हैं जैसे उनके राज्य देश से अलग कोई अन्य देश है।*
केंद्र को इस हालात के बारे में गंभीरता से सोचना चाहिएकश्मीर में तो पूर्ण रूप से अमन चैन है, लेकिन इन दोनों राज्यों में जगह-जगह कश्मीर बन रहे हैं। इनका उपचार केवल चुनाव नहीं हो सकता है बल्कि कश्मीर जैसा कुछ अलग होना चाहिए।
*दोनों राज्यों के घनी आबादी वाले कुछ क्षेत्रों को सीधे केन्द्र के अधीन कर देना चाहिए और उन्हें केन्द्र शासित प्रदेश बना देना चाहिए।* और दोनों राज्यों के तुलनात्मक रूप से अन्य शांत क्षेत्रों को राज्य बनाए रखना चाहिए*जैसे मुंबई और उसके आस-पास के क्षेत्रों को केंद्र शासित प्रदेश बना देना चाहिए और बाकी प्रदेश को राज्य बना रहने देना चाहिए।* जैसे कि कश्मीर से उन्होंने लद्दाख को किया था। भले ही यह सुझाव कुछ लोगों को थोड़ा अटपटा लगेगा  है, लेकिन अन्य कोई विकल्प भी नहीं है।

  बंगाल में मंत्र पढ़ने और मन्दिर जाने से कोई फायदा नहीं होता देखकर *(मैंने पहले ही लिख दिया था कि मौसमी हिन्दु बनने से आज तक किसी को फायदा नहीं हुआ, जब ओरिजनल आपके पास है तो डुप्लीकेट को कौन पूछता है)* मोमता खातून ने अपना असली खेल यानी उसके सलाहकार PK के तीस प्रतिशत से शुरू होने वाले मतदाताओं को लुभाने का प्रयास शुरू कर दिया है*आज टीएमसी के एक नेता शेख आलम ने कहा कि हिंदुओं को किसी गलतफहमी में नहीं रहना चाहिए कि वे देश में निर्णायक है। यदि सारे मुस्लिम एक हो जाए तो वे चार पाकिस्तान और बना सकते हैं।*
खैर ऐसे विवादित बयान तो मुस्लिम नेता देते रहते हैं लेकिन जो अपने आपको Secular बोलते हैं, उन नेताओं को सोचना चाहिए कि वे एक समुदाय का तुष्टीकरण करके वे अपना और अपनी पार्टी को धीरे- धीरे नाश कर रहे हैंआखिर में तो हिन्दुओं का वोट भी उन्हें चाहिए होगा।लेकिन *यदि वे एक समुदाय के तुष्टीकरण इसी तरह करते रहे तो कुछ सालो बाद भारत में केवल बीजेपी और मवैशी या उसके जैसी पार्टियां रहेगी।* स्वतंत्रता के पहले जैसे कॉंग्रेस और मुस्लिम दल थे।

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