Monday, January 17, 2022
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दूसरी लहर के गंभीर संक्रमितों में डिप्रेशन का बढ़ा खतरा

दूसरी लहर में किसी तरह बची थी जान, तीसरी लहर की आशंका से मन हुआ परेशान

– जिला अस्पताल, प्राइवेट हास्पिटल में लगातार बढ़ रहे डिप्रेशन के मामले

बरेली। रूपाली सक्सेना

कोरोना संक्रमण की तीसरी लहर आने की तेज होती आशंका ने दूसरी लहर में संक्रमित हुए मरीजों को बेचैन, तनावपूर्ण कर दिया है। खासकर ऐसे मरीज जिनकी दूसरी लहर में हालत बेहद गंभीर हो गई थी और अस्पताल मे भर्ती कराने से लेकर आक्सीजन की किल्लत तक से जूझना पड़ा था। न केवल ऐसे मरीज, बल्कि उनके परिवार के लोग भी तीसरी लहर आने की आशंका से डरे-सहमे हैं। यह तनाव उनको डिप्रेशन में खींच रहा है।

जिला अस्पताल के मनकक्ष और प्राइवेट अस्पतालों में न्यूरोफिजिशियन के यहां ऐसे मरीजों की संख्या 35 फीसदी तक बढ़ गई है। कोरोना की तीसरी लहर क्या आएगी और अगर ऐसा हुई तो यह कितनी घातक होगी, इलाज की व्यवस्था बनी रहेगी या नहीं, ऐसे ही कई सवालों ने उन लोगों को परेशान कर दिया है, जो बीते साल कोरोना की दूसरी लहर में संक्रमित हुए थे। दूसरी लहर के जख्मों की कड़वी यादें तीसरी लहर की आशंका मात्र से फिर ताजा हो गई हैं। अस्पतालों में बेड नहीं थे, दूसरे शहर ले जाने को एंबुलेंस मिलना मुश्किल हो गया था और आक्सीजन की किल्लत से मरीज जूझ रहे थे, रेमडेसेविर जैसे इंजेक्शन-दवाओं की कालाबाजारी ने मरीजों-तीमारदारों को अंदर तक हिलाकर रख दिया था।

मन घबराना, रात में नींद न आना और तीसरी लहर की आशंका से उदासी, तनाव बढ़ता जा रहा है। इसका सीधा असर उनकी प्रतिरोधक क्षमता पर पड़ रहा है। जिला अस्पताल के मनकक्ष में ऐसे मरीजों की संख्या बढ़ रही है। प्रति सप्ताह 120 से अधिक मरीज ऐसे आ रहे हैं जो डिप्रेशन में हैं, उनको एंजाइटी की शिकायत है और इसकी वजह कहीं न कहीं दूसरी लहर का दुखद अनुभव है।

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