Monday, January 17, 2022
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मैं तथागत की धरा से आ रही हूँ……..

आप सभी को बुद्ध पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएँ!


मैं तथागत की धरा से आ रही हूँ,

चाहते हो ध्यान मेरा भंग करना ?

 यह कभी सम्भव नहीं है..यह कभी सम्भव नहीं है !
लक्ष्य साधे, धैर्य धरकर कर्म पथ पर चल पड़ी हूँ

वर्जनाएँ रोकती हैं किन्तु मैं ज़िद पर अड़ी हूँ

दुख मिले या सुख मिले अब कर लिया आश्वस्त ख़ुद को

मैंने दुख से जन्म पाया और मैं सुख में बढ़ी हूँ
त्याग कर जो मोह माया जोगियों सा चल दिया है

पीर के नव रंग छूकरपास में उसके जगत का कौन सा वैभव नहीं है ? 
जानती हूँ फिर कहीं मुझको मिलेगी

इक सुजाताऔर संभवतः मुझे दिख जाए

अंगुलिमाल आताराह में अच्छा बुरा सब कुछ मिलेगा

यह विदित है सत्य की चिर जीत तय है

झूठ हरदम हार जाता 
हों परिस्थितियाँ भले प्रतिकूल मेरीकर लिया तैयार मैंने

चित्त अपनाक्योंकि मैं यह मानती हूँ, हर समय उत्सव नहीं है ! 
वो कि जिसको दूसरों के घाव का आभास होता

 और उनकी वेदना को देख जिसका आत्म रोता

ढूँढ़ने को सत-असत वो चल पड़ा एकांत पथ पर

बुद्धता को प्राप्त कर वो धर्म के नव बीज बोता 
आज मेरी आत्मा आकुल तृषा से

साधनारत मग्न होकर मन टटोले पर, 

तथागत ध्यान में है शेष कोई रव नहीं है!

 अंकिता सिंह 

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