दोषियों को फांसी : निर्भया की मां बोलीं, दूसरों को इंसाफ के लिए लड़ेंगे

Image result for सुप्रीम कोर्ट      दिल्ली ,विधि संवाददाता –   अपनी बेटी के निर्मम हत्यारों की फांसी की सजा बरकरार रखने के फैसले से संतुष्ट निर्भया के माता-पिता की लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। अब उनका मकसद देश की अन्य पीड़िताओं को इंसाफ दिलाना है। निर्भया की मां आशा देवी और पिता बद्रीनाथ ने साफ कर दिया कि वे आराम से बैठने वाले नहीं हैं।

आंसू छलक उठे : फैसला सुनने के बाद निर्भया के माता-पिता के आंसू छलक उठे। पीड़िता की मां ने कहा कि निर्भया अब पूरे देश की बेटी है। ऐसे ही पूरे देश की बेटियां उनकी अपनी बेटियां हैं। उन बेटियों पर अगर कोई बुरी नजर डालेगा तो वह चुप नहीं बैठेंगी। उनके साथ खड़ी होंगी और न्याय की लड़ाई लड़ेंगी। इसके लिए उन्होंने निर्भया ज्योति ट्रस्ट भी शुरू किया है।

खुशी के साथ दर्द भी : पीड़िता की मां को हालांकि इस बात की पीड़ा भी है कि न्याय के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा। निर्भया के मामले को प्राथमिकता से लेने के बावजूद साढ़े चार साल लग गए। उनके मुताबिक अभी भी दोषियों को फांसी पर लटकाए जाने के लिए अंतिम मुहर का इंतजार बाकी है। 

लंबा संघर्ष : उन्होंने कहा, ‘न्याय पाने की प्रक्रिया में ऐसे कई मोड़ आए, जब मैं खुद को टूटता हुआ महसूस करने लगी थी और हार मानने लगी थी। लेकिन तभी मेरी बेटी का चेहरा मेरी आंखों के सामने घूमने लगता था। इसी से मुङो आगे बढ़ने का हौसला मिलता रहा।’

आभार जताया : लंबी कानूनी लड़ाई में साथ देने वालों का आभार जताते हुए निर्भया की मां ने कहा, ‘हम उन सभी का शुक्रिया अदा करते हैं, जिन्होंने मुश्किल वक्त में हमारी मदद की।’

बेटी का बर्थडे गिफ्ट : आशा देवी नम आंखों से यह भी बोलीं, ‘आज अगर मेरी बेटी जिंदा होती, तो 10 मई को 28 साल की होती। यह फैसला बेटी का बर्थडे गिफ्ट है।’ 

पिता बोले, फैसले से समाज को सही संदेश : देर से सही लेकिन आखिर न्याय मिलने से संतुष्ट निर्भया के पिता बद्रीनाथ ने कहा, ‘इस दौरान एक दिन भी चैन से नहीं सो पाया हूं। अब शायद मुङो नींद आएगी और बेटी की आत्मा को भी शांति मिलेगी।’ उन्होंने कहा कि समाज में सही संदेश देने के लिए फांसी की सजा जरूरी थी। निर्भया के माता-पिता यह भी चाहते हैं कि उनकी बेटी को उनके नाम से ही जाना जाए।

   अब ये कानूनी लड़ाई सिर्फ एक बेटी की नहीं रह गई है। हमारा मकसद देश की उन सभी बेटियों के साथ खड़े होना है, जो किसी न किसी तरह की दरिंदगी की शिकार हुई हैं।आशा देवी, निर्भया की मां