Thursday, September 29, 2022
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कहीं बीमार न कर दे गुस्सा……

क्रोध वह भाव है, जो स्वयं को दूसरे से अधिक क्षति पहुंचाता है।

गुस्सा आना एक सामान्य बात है। यह एक स्वस्थ मानव भावना है, लेकिन जब यह नियंत्रण से बाहर हो जाता है तो विनाशकारी हो जाता है। अनियंत्रित गुस्से के कारण सामाजिक, व्यक्तिगत और भावनात्मक रूप से कई नुकसान उठाने पड़ सकते हैं। जिन लोगों को बात-बात पर गुस्सा आता है, उनमें कई स्वास्थ्य समस्याओं की आशंका बढ़ जाती है। 

Manju Lata Shukla

तनाव और / या चिंता, जो क्रोध के अग्रदूत हैं, से मुक्ति पाने का एक उपयोगी तरीका मेडिटेशन है। जब तक आप शांत न हो जाएँ तब तक उन सभी चीजों से बचें जो आपको क्रोधित करने में शामिल थे। हर चीज़ या व्यक्ति को ब्लाक कर दें और किसी शांत जगह पर जाएं और तब तक गहरी सांस लें जब तक आप रूप से शांत न हों जाएँ।

क्यों आता है गुस्सा? 
गुस्सा आंतरिक और बाहृय दोनों कारणों से आ सकता है। आपको कोई व्यक्ति गुस्सा दिला सकता है। वह आपका सहकर्मी, दोस्त, परिवार का सदस्य या कोई अनजान व्यक्ति हो सकता है। कोई घटना जैसे ट्रैफिक जाम, फ्लाइट या ट्रेन का रद्द होना या आपको अपनी व्यक्तिगत समस्याओं के कारण गुस्सा आ सकता है। अगर चिकित्सकीय भाषा में बात की जाए तो गुस्सा तब आता है, जब हाइपोथैलेमस से ऑक्सीटोसिन, वेसोप्रेसिन और कार्टिकोट्रोपिन हार्मोन तेजी से स्त्रावित होते हैं। इसके परिणाम स्वरूप पिट्युटरी ग्रंथि अधिक मात्रा में एड्रेनोकोर्टिकोट्रॉपिक हार्मोन का स्त्रावण करने लगती है। इससे एड्रीनल कार्टेक्स द्वारा कॉर्टिकोस्टेरॉयड का स्रावण होता है। यह हार्मोन गुस्से को ट्रिगर करता है। 

स्वास्थ्य को कैसे प्रभावित करता है गुस्सा
कई अध्ययनों में यह बात सामने आई है कि गुस्से के दौरान शरीर में फिजियोलॉजिकल और बायोलॉजिकल परिवर्तन होते हैं। जब आप गुस्से में होते हैं, आपके हृदय की धड़कनें और रक्तदाब बढ़ जाता है और एनर्जी हार्मोन्स एड्रीनलीन और नारएड्रीनलीन का स्तर भी बढ़ जाता है। लगातार क्रोध की स्थिति से शरीर में तनाव बढ़ाने वाले हार्मोन्स का स्रावण बढ़ जाता है। अगर गुस्से को नियंत्रित नहीं किया जाए तो कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। 

कोरोनरी हार्ट डिसीज
गुस्से का सीधा प्रभाव कार्डियोवॉस्क्युलर सिस्टम पर होता है। गुस्से के कारण कार्टिकोस्टेरॉयड्स और कैटेकोलामाइन का स्त्रावण बढ़ जाता है। इससे दिल की धड़कनें बढ़ जाती हैं।  

डायबिटीज
गुस्से के कारण टाइप 2 डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है। जो लोग आसानी से गुस्सा हो जाते हैं, उनमें टाइप 2 डायबिटीज होने की आशंका 34 प्रतिशत अधिक होती है। कई अनुसंधानों में यह बात सामने आई है कि गुस्से के कारण ध्यान केंद्रण की शक्ति कम हो जाती है, जिससे जीवन की गुणवत्ता प्रभावित होती है। सिरदर्द, अनिद्रा, अवसाद, उच्च रक्तचाप आदि की भी आशंका बनी रहती है।

गुस्से पर नियंत्रण
यह एक प्रक्रिया है, जिसमें गुस्से के लक्षणों को पहचाना जाता है और उसके उचित प्रबंधन करने के लिए कदम उठाए जाते हैं। इस प्रक्रिया को एंगर मैनेजमेंट का नाम दिया गया है। एंगर मैनेजमेंट आपको गुस्से की भावना से दूर रखने का प्रयास नहीं करती और न ही इसे रोक कर रखने को कहती है। गुस्सा एक स्वस्थ भावना है, लेकिन इससे सकारात्मक रूप से निबटना बहुत आवश्यक है। अनियंत्रित गुस्से से आपके स्वास्थ्य और आपके संबंधों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। हमें बचपन से सिखाया जाता है कि गुस्सा करना बुरी बात है, इसलिए हम नहीं सीख पाते कि इससे कैसे निबटा जाए या सकारात्मक मोड़ दिया जाए। गुस्से को काबू में रखना एक चुनौतीभरा काम हो सकता है, लेकिन इस चुनौती का सामना करना हमारे जीवन और स्वास्थ्य के लिए बहुत आवश्यक है।

क्रोध जीव के स्वभाव और जीवन से जुड़ा ऐसा भाव है, जो विफलताओं, अतृप्त कामनाओं और दुर्बलताओं के कारण किसी दूसरे के प्रति हृदय में उत्पन्न होता है। यह किसी भी दूसरे व्यक्ति, विचार, भाव या प्रभाव के प्रति निजी असहमति को दर्शाता है। इसके कारण निजी, पारिवारिक, सामाजिक, वित्तीय, व्यावसायिक अथवा प्रवृत्तिगत, कुछ भी हो सकते हैं। कभी-कभी सहज से तेज गति में परिवर्तित होते क्रोध को समय रहते नियंत्रित नहीं किया गया, तो उसके परिणाम अत्यंत घातक और पश्चाताप के भाव जगाने वाले हो सकते हैं। इसलिए आवश्यक है कि शारीरिक व मानसिक दुर्बलताओं को दूर करने का विशेष ध्यान रखा जाए।

बोलने से पहले सोचें
गुस्से में ऐसा कुछ कहना बहुत आसान होता है, जिस पर आपको बाद में पछतावा हो। कुछ भी कहने से पहले एक बार अच्छे से सोच लें। अपने गुस्से को नियंत्रित करने के बाद ही अपनी भावनाओं को अभिव्यक्त करें।

व्यायाम करें
नियमित रूप से व्यायाम करने से मूड ठीक रहता है और तनाव का स्तर कम होता है। इसका कारण यह है कि शारीरिक सक्रियता स्ट्रेस केमिकल्स को जला देती है और मूड को बेहतर बनाने वाले न्युरोट्रांसमीटर के स्रावण को बढ़ा देती है, जिनमें एंडॉरफिन और कैटेकोलामिन्स प्रमुख हैं।

संभावित हल को पहचानें 
इस बात पर ध्यान केंद्रित करने की बजाय कि किस बात ने आपको गुस्से से पागल कर दिया है, उस मुद्दे का हल ढूंढ़ने पर अपना ध्यान केंद्रित करें। 

जीवन में क्रोध पर नियंत्रण के पांच सूत्री सिद्धांत हैं- क्रोध आने पर पहले क्षण भर के लिए रुकें;

कारणों पर विचार करें;

स्वयं से क्रोध के कारणों की पड़ताल करें;

क्रोध की बढ़ती मात्रा को कम करें

और गुस्से को नियंत्रित करने में सफल होने पर स्वयं को पुरस्कृत करें।

क्रोध वह भाव है, जो स्वयं को दूसरे से अधिक क्षति पहुंचाता है। उनका सुझाव है कि जब भी क्रोध आए, सबसे पहले दस तक गिनती गिनें, तीन बार गहरी सांस लें, घटनास्थल को छोड़ दें, स्वयं से इसका कारण पूछें और खुद को प्रकृति के हवाले कर दें। ऐसा करके कोई भी क्रोधी व्यक्ति स्वयं को किसी बुरी घटना से बचा सकता है। कैलिफोर्निया स्टेट यूनिवर्सिटी के मनोविश्लेषक टॉम जी स्टीवेन्स ने अपनी किताब ओवरकम एंगर ऐंड एग्रेसन में स्पष्ट किया है कि क्रोध-नियंत्रण का एक प्रमुख तरीका यह है कि स्थिति को अपने नहीं, दूसरों के नजरिये से देखें। दूसरों को उन स्थितियों पर प्रकाश डालने के लिए प्रोत्साहित करें, क्षमा करना सीखें, बीते को बिसारने की आदत विकसित करें, और किसी को चोट पहुंचाने के बजाय प्रशंसा से उनका मूल्यांकन करें। याद रखें, क्रोध-नियंत्रण से आप स्वयं को शक्तिशाली बनाते हैं। इससे आपकी खुशहाली और स्मृतियों का विस्तार होता है। 

क्षमा करना सीखें 
अगर आप किसी के लिए मन में दुर्भावना पालेंगे तो आप कड़वाहट से भर जाएंगे। अगर आप किसी को माफ कर सकते हैं, जिसने आपको गुस्सा दिलाया है तो यह उसके लिए ही नहीं, आपके लिए भी एक सकारात्मक बात होगी। 

सकारात्मक सोच विकसित करें 
ऐसी किताबें पढ़ें, जो आपको प्रेरित करें और आपका उत्साह बढ़ाएं। अपने मस्तिष्क को नियमित रूप से सकारात्मक और प्रेरणादायी सामग्रियों की खुराक दें।

मानसिक शांति के लिए ध्यान करें
ध्यान को मस्तिष्क की खुराक माना जाता है। ध्यान करने से मस्तिष्क में उन रसायनों का स्रावण होता है, जो उसे शांत रखते हैं। आपकी दिनर्चा कितनी भी व्यस्त हो, प्रतिदिन 10 मिनट का समय ध्यान करने के लिए अवश्य निकालें।

संतुलित भोजन खाएं 
भोजन भी हमारी भावनाओं को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। जिन लोगों के रक्त में शुगर का स्तर अनियंत्रित होता है या जिनका रक्तदाब असामान्य होता है, उनका स्वभाव चिड़चिड़ा होता है और वो आसानी से उत्तेजित हो जाते हैं। ताजे फल, सब्जियां, साबुत अनाज, स्वस्थ वसा स्वास्थ्य के लिए बहुत उपयोगी है।

भरपूर सोएं     
नींद की कमी से मस्तिष्क पूरी क्षमता के साथ काम नहीं कर पाता। इससे सोचने की क्षमता, सृजनशीलता और समस्याओं को हल करने की क्षमता कम होती है और गुस्सा आता है।

गुस्से को कैसे करें काबू
गुस्सा एक मानव भाव है, जो थोड़ी सी चिड़चिड़ाहट से लेकर अत्यंत रोष के रूप में अभिव्यक्त हो सकता है। गुस्से को काबू में रखना और सकारात्मक रूप से बाहर निकालना बहुत जरूरी है। अपने गुस्से को काबू में रखने के लिए आप निम्न उपाय अपना सकते हैं।
0 जब भी गुस्सा आए, अपनी भावनाओं को नियंत्रित रखने का प्रयास करें। 
0 गहरी सांस लें। छाती से सांस लेने से आप रिलैक्स नहीं होंगे। आपको पेट से सांस लेना चाहिए।
0 कोई भी ऐसा शब्द, जिससे आपको शांति का अनुभव हो, जैसे ‘रिलैक्स’, ‘टेक इट ईजी’ दोहराएं। इन शब्दों को गहरी सांस लेते हुए दोहराएं।
0 किसी ऐसे अनुभव को याद करें, जो आपको रिलैक्स करे। यह आपके अतीत का कोई अनुभव हो सकता है।
0 कुछ योगासन करें। इससे आपकी मांसपेशियां रिलैक्स होंगी और आप अधिक शांति अनुभव करेंगे। 
0 जब आपको लगे कि गुस्सा आ रहा है तो वॉक पर चले जाएं या दौड़ लगाएं। स्विमिंग, साइकलिंग या कोई आउटडोर खेल भी खेल सकते हैं। 
0 अपने काम से थोड़ी देर का ब्रेक ले लें। शांत बैठें। उस स्थिति के सभी पहलुओं पर विचार करें।
0 एक से 10 तक गिनें, ताकि आपका मस्तिष्क शांत हो सके। अब उन कारणों को समझने की कोशिश करें, जिनसे गुस्सा आया।

क्रोध-नियंत्रण से हम अपना ही नहीं, दूसरों के उजड़ते संसार को फिर से आबाद कर सकते हैं, क्योंकि शांत मन सृजन में समर्थ होता है। हमारे सृजनात्मक होने से ही मानवता का हित सध सकता है। तो जब भी क्रोध आए, इन उपायों को आजमाएं। जीवन में बिखरी हुई चीजों को संवारने की ओर कदम खुद बढ़ चलेंगे। 

(लेखक रसायन शास्त्र में परास्नातक की छात्रा है तथा धार्मिक मामलो की जानकार है )

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