Monday, January 17, 2022
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सीरियल रेपिस्ट को फंदे पर लटकाने का रास्ता साफ, कोर्ट ने रेपिस्ट की तुलना शैतान से की

पानी मांगने के बहाने घरों में घुसकर महिलाओं से रेप और फिर मर्डर करने वाले सीरियल रेपिस्ट उपेश रेड्डी को कर्नाटक हाईकोर्ट ने झटका दिया है। निचली अदालत के फांसी की सजा को बरकरार रखते हुए हाई कोर्ट ने उसकी उम्रकैद की मांग को खारिज कर दिया। दोषी उमेश अक्सर उन महिलाओं को निशाना बनाता था, जो घर में अकेली होती थी। उसे नौ महिलाओं के साथ दरिंदगी और हत्या के आरोप में दोषी करार दिया गया है। हालांकि पुलिस सूत्रों का कहना है कि उसने कम से कम 18 महिलाओं के साथ रेप और उनकी हत्या की है। 

कर्नाटक हाईकोर्ट ने बुधवार को मामले की सुनवाई करते हुए उमेश रेड्डी की फांसी की सजा को बरकरार रखा। मामले में जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस प्रदीप सिंह की अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि अपराध को देखते हुए दोषी नरमी का हकदार नहीं है। 

मामले में जांच करने वाले इंस्पेक्टर बीएन न्यामेगौड़ा का कहना है कि उमेश बेहद क्रूर और शातिर किस्म का अपराधी है। वह सुबह 11 बजे से 2 बजे के बीच घर में अकेले रहने वाली महिलाओं को निशाना बनाता था। उन्होंने कहा कि वह पांच बार पुलिस को चकमा भी दे चुका है। 

सीआरपीएफ कमांडेट की बेटी से रेप 

बीएन न्यामेगौड़ा के मुताबिक, केंद्रीय सशस्त्र रिजर्व बल(सीआरपीएफ) में शामिल होने के बाद ही उमेश की आपराधिक प्रवृत्ति शुरू हो गई थी। ट्रेनिंग के बाद वह कश्मीर में तैनात था और अपने कमांडेंट की बेटी के साथ ही रेप करने के बाद कैंप से फरार हो गया। उस वक्त उसके आपराधिक इतिहास के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी, इसलिए सीआरपीएफ से भागकर वह चित्रदुर्ग आ गया और नवंबर 1996 में जिला सशस्त्र रिजर्व (डीएआर) में कांस्टेबल बन गया। लेकिन वह वहां भी नहीं रहा, वहां भी एक बलात्कार के मामले में वह पकड़ा गया था। 

उसने पहले चित्रदुर्ग के केईबी कॉलोनी में एक लड़की के साथ बलात्कार करने की कोशिश की, लेकिन लड़की ने शोर मचा दिया। कुछ ही दिनों बाद उसने उसी जिले में एक महिला के साथ बलात्कार किया और उसकी हत्या कर दी। उसे 1997 में बलात्कार के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। लेकिन दो महीने के भीतर ही वह जेल से भाग गया।

न्यामेगौड़ा ने बताया, “रेड्डी पहली बार तब भागा जब उसे मार्च 1997 में बेल्लारी जेल से शिफ्ट किया जा रहा था। बाद में उसे जुलाई 1997 में महिलाओं के अंडरगारमेंट्स चोरी करने का प्रयास करते हुए गिरफ्तार किया गया था। लेकिन 24 घंटे के अंदर वह फरार हो गया। उसे पीन्या पुलिस ने 28 फरवरी 1998 को उस समय पकड़ा, जब वह एक महिला की हत्या कर भागने की कोशिश कर रहा था। लेकिन वह कोर्ट में लाए जाने के दौरान फरार हो गया।

पांच नाबालिगों सहित कम से कम 18 महिलाओं के बलात्कार और हत्या में शामिल उमेश अपने पास हथियार भी रखता था। वारदात के वक्त वह पानी पीने या किराए पर कमरा देखने के बहाने घर के अंदर घुसता है फिर हथियार दिखाकर महिलाओं को रस्सी से बांध देता था। फिर रेप के बाद हत्या करके घर से निकल जाता था। बकौल न्यामेगौड़ा, उमेश एक मानसिक रोगी है, वह हत्या के बाद महिलाओं के अंडरगारमेंट्स भी अपने साथ ले जाता था। 

रेड्डी को आखिरकार 17 मई 2002 को यशवंतपुर पुलिस ने ऑटोरिक्शा चालक की निशानदेही पर सैलून से गिरफ्तार किया। फरवरी 2009 में निचली अदालत ने उमेश को दोषी मानते हुए फांसी की सजा सुनाई थी।

कोर्ट ने उमेश की तुलना शैतान से की

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