विकास नहीं तो वोट नहीं: अमेठी, परसौली ग्राम के लोगों ने किया मतदान बहिष्कार

सोमवार को जब अमेठी के अन्य इलाकों में लोग बढ़-चढ़कर मतदान में हिस्सा ले रहे थे, तब अमेठी के परसौली गांव में एक स्कूल पर बना मतदान केंद्र सूना ही रहा. अमेठी में पांचवें चरण में चुनाव के लिए परसौली गांव में इस प्राइमरी स्कूल को पोलिंग स्टेशन के तौर पर चुना गया था. इसके बावजूद भी यहां वोटरों की कतार तो दूर एक भी वोटर सुबह से दस्तक देने नहीं आया.

वादे हैं वादों का क्या
गांववालों की माने तो हर बार नेता आते हैं बड़े-बड़े वादे करते हैं, मगर जब वादों को पूरा करने का वक्त आता है तो गायब हो जाते हैं. यही वजह है कि उनका गांव आज आजादी के 70 साल बाद भी बेहद पिछड़ा है. अमेठी राहुल गांधी का गढ़ है और यहां भाजपा सपा से लेकर सभी दल अपनी साख बनाने में जुटे हैं पर पारसौली की हकीकत यह है कि यहां का वोटर नेताओं से त्रस्त आ चुका है. उनको अब यहां के सियासतदानों पर भरोसा नहीं. यही कारण है कि उन्होंने वोट ना डालने का मन बना लिया है.

आलम यह है कि यहां के प्राइमरी स्कूल में बने पोलिंग स्टेशन पर सुबह से एक भी मतदाता वोट डालने नहीं आया. नाराज गांव वाले कहते हैं कि आए दिन यहां पर सड़क हादसे में किसी न किसी गांव वाले को चोट लगती रहती है. यहां कोई भी सवारी लाना पसंद नहीं करता और मोटा किराया मांगता है.

यही नहीं, इस गांव में मूलभूत सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हैं. न तो पेयजल है, न शौचालय और न ही बिजली सही तरीके से आती है. खास बात यह है कि वह यहां के विधायक और सपा के मंत्री गायत्री प्रजापति, सांसद राहुल गांधी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, सबसे नाराज हैं. उनको लगता है कि सभी सियासी दल एक ही थाली के चट्टे-बट्टे हैं.

दिलचस्प बात यह भी है कि यहां पर कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी आ चुके है और गांव का जायजा भी लिया था. इसके बाद भी इस गांव की किस्मत नहीं बदली. समाजवादी पार्टी के विवादास्पद मंत्री गायत्री प्रजापति यहां पर कई चक्कर काट गए और वोटरों को मनाने की कोशिश की.

उन्होंने यहां तक कहा कि अगर वह वोट डालेंगे, तो अगली बार उनके गांव में सड़क बनेगी मगर गांव वाले नहीं माने. उनका कहना है कि अब वोट तभी पड़ेगा जब सड़क बनेगी.