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स्वामी चिन्मयानंद केस: हाईकोर्ट से पीड़िता को झटका

प्रयागराज
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्वामी सुखदेवानंद लॉ कॉलेज शाहजहांपुर की एलएलएम छात्रा द्वारा स्वामी चिन्मयानंद पर दुराचार का आरोप एवं पीड़िता छात्रा के खिलाफ लगे ब्लैकमेलिंग के आरोपों की एसआईटी के जांच के तरीके को सही माना है। हाईकोर्ट ने पीड़ित छात्रा द्वारा जांच प्रक्रिया पर उठाए गए सवालों को खारिज कर दिया है।

स्वामी चिन्मयानंद केस: हाईकोर्ट से पीड़िता को झटका Capture 5

अटल बिहारी सरकार में गृह राज्यमंत्री रहे स्वामी चिन्मयानंद (Swami Chinmayanand) पर दुराचार का आरोप लगाने वाली एलएलएम छात्रा (LLM Student) की मांग को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। इस मामले की जांच के लिए गठित एसआईटी की जांच पर सवाल उठाने की छात्रा की मांग को कोर्ट ने खारिज कर दिया है।

कोर्ट ने पीड़िता के थाना लोधी रोड, नई दिल्ली में की गई शिकायत की अलग से जांच करने की मांग पर यह कहते हुए हस्तक्षेप करने से इंकार कर दिया है कि एसआईटी ने पीड़िता के बयान व शिकायत सहित सभी पहलुओं पर विचार करते हुए अपनी रिपोर्ट कोर्ट में पेश कर दी है। जिस पर कोर्ट नियमानुसार कार्यवाही करेंगी।
कोर्ट ने पीड़िता की तरफ से बाथरूम में नहाते हुए स्वामी चिन्मयानंद द्वारा ली गई उसकी तस्वीर की अलग से जांच कराने की मांग को भी निराधार बताया है। साथ ही एसआईटी द्वारा पीड़िता के परिवार के उत्पीड़न के आरोपों को भी तथ्यात्मक मानते हुए राहत देने से इनकार कर दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा तथा न्यायमूर्ति दीपक वर्मा की खंडपीठ ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर लापता छात्रा केस की मॉनीटरिंग के लिए गठित जनहित याचिका सुनवाई करते हुए दिया है।

अचानक लापता हो गई थी पीड़िता
बता दें कि स्वामी सुखदेवानंद लॉ कॉलेज शाहजहांपुर की एलएलएम छात्रा 24 अगस्त 2019 से लापता हो गई थी। इस खबर को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने लड़की की तलाश करने का सख्त निर्देश दिया था। 2 सितंबर 2019 को सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव को निर्देश दिया था कि वह विशेष जांच टीम गठित कर लापता लड़की को कोर्ट में पेश करें। एसआईटी ने राजस्थान से लड़की को अपने दोस्तों के साथ बरामद किया और सुप्रीम कोर्ट में पेश किया। जहां उसका बयान दर्ज कर पीड़िता व परिवार को सुरक्षा प्रदान करने का निर्देश दिया गया।

पीड़िता पर लगा था ब्लैकमेलिंग का आरोप
दुराचार के आरोपी स्वामी चिन्मयानंद से 5 करोड़ रुपए की मांग करने का वीडियो वायरल हुआ था। स्वामी की तरफ से पीड़िता पर ब्लैकमेलिंग करने की शिकायत की गई। जिसकी एफआईआर दर्ज हो चुकी है। पीड़िता ने 5 सितंबर 2019 को लोधी रोड नई दिल्ली में विस्तृत शिकायत की। सुप्रीम कोर्ट ने ब्लैकमेलिंग और दुराचार दोनों मामलों की विवेचना की मॉनिटरिंग इलाहाबाद हाईकोर्ट को सौंप दी। हाईकोर्ट के निर्देशानुसार एसआईटी ने सभी पहलुओं पर विचार कर पुलिस रिपोर्ट कोर्ट में दाखिल कर दी है। हाईकोर्ट के ही आदेश के तहत इस मामले की सुनवाई अब लखनऊ की अदालत में की जा रही है।

अलग से एफआईआर का औचित्य नहीं
पीड़िता की तरफ से हाईकोर्ट में अर्जी दी गई, जिसमें मांग की गई कि 5 सितंबर 2019 को लोधी रोड में दर्ज शिकायत की अलग से एफआईआर दर्ज कर विवेचना की जाए और पक्षपात न कर निष्पक्ष विवेचना कराई जाए। एक अर्जी में पीड़िता ने एसआईटी पर परिवार के उत्पीड़न का आरोप लगाया और एसआईटी के लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। कोर्ट ने कहा कि चिन्मयानंद पर दुराचार के आरोप में एफआईआर पहले से दर्ज है। दिल्ली में की गई शिकायत पहले से कायम की गई प्राथमिकी का विस्तृत स्वरूप है। अलग से एफआईआर दर्ज करने की जरूरत नहीं है।

पुलिस को अपनी राय रखने का अधिकार
यह भी कहा गया कि आरोप पत्र धारा 376 (सी) में दाखिल किया है जबकि 376 के आरोप में पुलिस को रिपोर्ट पेश करनी चाहिए थी। इस पर कोर्ट ने कहा कि पुलिस विवेचना के दौरान अपनी राय कायम करने के लिए स्वतंत्र है। पुलिस को रिपोर्ट पेश करने के पश्चात साक्ष्यों व तथ्यों के आधार पर कोर्ट को भी अपनी राय बनाने का स्वतंत्र अधिकार है। कोर्ट साक्ष्यों के आधार पर पुलिस द्वारा लगाई गई धाराओं में परिवर्तन कर सकती है। पुलिस ने किस धारा में रिपोर्ट पेश की है, इससे मुकदमे की सुनवाई पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा।

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