Friday , July 3 2020 [ 12:37 AM ]
Breaking News
Home / विविध / लेख / सामाजिक समरसता के प्रणेता एवंभेदभाव के विरुद्ध भगवान बुद्ध
सामाजिक समरसता के प्रणेता एवंभेदभाव के विरुद्ध भगवान बुद्ध Capture 23

सामाजिक समरसता के प्रणेता एवंभेदभाव के विरुद्ध भगवान बुद्ध

भेदभाव के विरुद्ध भगवान बुद्ध

सामाजिक समरसता के प्रणेता एवंभेदभाव के विरुद्ध भगवान बुद्ध Capture 23

भगवान बुद्ध के जन्म, महापरिनिर्वाण एवं ज्ञान (बुद्ध) प्राप्ति दिवस वैशाख पूर्णिमा के अवसर पर समस्त प्राणीमात्र को हार्दिक शुभकामनाएं
ईसा से पांच सौ तिरसठ (563) वर्ष पूर्व एक ऐसे महामानव का अवतरण इस धरती पर हुआ जो ममता व करुणा के साक्षात अवतार एवं किसी भी जीव के दु:ख को दूर करने के लिए संकल्पित थे. जिनके विचार भारतवर्ष की सीमाओं को पारकर अनेक देशों ने सहर्ष स्वीकार कर लिये ऐसे महामानव को लोग श्रद्धा से गौतम बुद्ध या तथागत कहते हैं.
भगवान बुद्ध का प्राकट्य भारतीय समाज जीवन की एक युगान्तकारी घटना थी. इस घटना ने एक नई सामाजिक क्रांति का सृजन किया. सैकड़ो वर्षों से व्याप्त रुढियों, अंधविश्वासों, भेदभावों तथा अनेकों जड़ मान्यताओं को उन्होंने अमान्य कर दिया. स्वर्ग और नर्क की धारणाओं के आधार पर व्याप्त ढोंग- पाखंड का उन्होंने त्याग कर धर्म शास्त्रों पर सभी जाति वर्ग के लोगों तथा स्त्रियों का भी समान अधिकार है प्रस्थापित कर दिखाया. उनके “करुण- भाव दर्शन” तथा व्यर्थ आडंबर से रहित साधना पद्धति ने दु:खों से मुक्त होने का एक नया एवं सरल मार्ग दिखलाया. कुछ ही समय में बौद्ध मत सम्पूर्ण भारत के साथ साथ भारतवर्ष की सीमाओं को लांघकर नेपाल, तिब्बत, बर्मा, वियतनाम, चीन, जापान, मंगोलिया, लंका, कोरिया, जवाब सुमात्रा आदि देशों में फैल गया. भगवान बुद्ध पश्चिम दिशा की ओर बढ़ते हुए ईरान, तुर्की, रूस, पोलैंड तथा पश्चिमी जगत के अनेक देशों में भी बौद्ध धर्म का प्रचार किया. नमो बुद्धाय
ॐ नमो बुद्धाय
भगवान गौतम बुद्ध के अवतरण दिवस की विश्व मंगल कामना के साथ जीवमात्र एवं स्वयं के कल्याणार्थ आग्रह है-
“बुद्धं शरणं गच्छामि,
धम्मम् शरणं गच्छामि,
संघं शरणं गच्छामि”

भगवान बुद्ध ने बहुजन हिताय एवं लोक कल्याण के लिए बौद्ध धर्म का प्रचार किया, उन्होंने सर्व सुलभ, सर्वग्राही और सरल मध्यम मार्ग का उपदेश दिया उनके उपदेश में कर्म की प्रधानता है इसीलिए उन्होंने कहा “अप्प दीपो भव” अपने को पहचानो, अपने भीतर स्वयं प्रकाश पैदा करो इसके लिए तुम्हें कठोर परिश्रम करना पड़ेगा.
भगवान बुद्ध के बताए धर्म के मध्यम मार्ग पंचशील (पांच वचन) :- 1- सत्य (झूठ न बोलना), 2- अहिंसा (किसी की हत्या न करना), 3- आस्तेय (चोरी न करना), 4- अपरिग्रह (आवश्यकता से अधिक का दान करना) तथा 5- नशा न करना” को जीवन में अपनाकर जीवन को सुखी तथा बुद्धत्व को प्राप्त किया जा सकता हैं. जगत में जो भी मनुष्य तथागत भगवान बुद्ध द्वारा बताए उपरोक्त मार्ग (वचन) का मन, वचन व कर्म से पालन करता है वही भगवान बुद्ध का सच्चा अनुयायी है. उन्होंने अपने को कभी गुरु अथवा ईश्वर नहीं माना, वे कहते थे कि मुझे गुरु मत मानो क्योंकि आज के संदर्भ में गुरु शब्द अत्यंत लांछित हो गया है, मुझे तुम अपना कल्याण मित्र मानो, तुम भी मेरे जैसा ही बुद्ध बन सकते हो इसके लिए आवश्यकता है परीश्रम करने की. उन्होंने पूजा पाठ, अग्निहोत्र, वाह्य आडंबर एवं पूजा में पशु बलि का विरोध किया.
भगवान बुद्ध कहते हैं कि संसार में चार सत्य जिसे वे आर्य सत्य कहते हैं निश्चित है, 1- दु:ख होना, 2- दु:ख का कारण, 3- दु:ख का निरोध है, 4- निरोध पाने का मार्ग है. बुद्ध बनने की इच्छा रखने वाले व्यक्ति को अष्टांगिक मार्ग यथा- सम्यक दृष्टि, सम्यक संकल्प, सम्यक वाक, सम्यक कर्म, सम्यक जीविका, सम्यक प्रयास, सम्यक स्मृति और सम्यक समाधि को अपनाना आवश्यक है. साथ ही दश पारमिताओं को भी पूरी करनी पड़ती है जैसे दान, शील, नैष्कर्म प्रज्ञा आदि.
वैदिक ऋषियों ने भगवान बुद्ध को भगवान विष्णु के दश अवतारों में नववां अवतार माना है दशवां कल्कि बताया है जिसका वर्णन अनेक पुराणों में साथ ही महाभारत में भी किया गया है.

सामाजिक समरसता के प्रणेता एवंभेदभाव के विरुद्ध भगवान बुद्ध rajendra

राजेन्द्र, सह प्रान्त सम्पर्क प्रमुख, अवध प्रान्त.

(लेखक राष्ट्रिय स्वयमसेवक संघ के पदाधिकारी है )

About Arun Kumar Singh

Check Also

इस तारीख से शनि चलेंगे उल्टी चाल, जानें किन राशि वालों को रहना होगा सतर्क, किसे होगा लाभ…जाने आचार्य रुपाली के साथ Capture 12 310x165

इस तारीख से शनि चलेंगे उल्टी चाल, जानें किन राशि वालों को रहना होगा सतर्क, किसे होगा लाभ…जाने आचार्य रुपाली के साथ

ग्रहों की स्थिति-सूर्य और बुध मेष राशि में हैं। शुक्र वृषभ राशि में हैं। राहु …

Leave a Reply

Copyright © 2017, All Right Reversed.