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प्रवासी मजदूरों को बस से लाने में लगेंगे महीनों, तमाम राज्यों ने स्पेशल ट्रेन की मांग रखी

नई दिल्ली। कोरोना वायरस के चलते देशभर में लॉकडाउन है, ऐसे में लाखों प्रवासी मजदूर अलग-अलग राज्यों फंसे हैं। इन मजदूरों को उनके घर पहुंचाने के लिए केंद्र सरकार ने निर्देश जारी करते सभी राज्यों को अनुमति दी है कि इन मजदूरों को बस से उनके घर वापस भेजा जाए। लेकिन तमाम राज्य सरकार के इस फैसले का विरोध कर रहे हैं। राज्यों का कहना है कि बसों से मजदूरों को उनके घर भेजना सही सुझाव नहीं है।

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ये राज्य मांग कर रहे हैं कि इसके लिए स्पेशल ट्रेन चलाई जाए। सात राज्यों ने मांग की है कि स्पेशल ट्रेनों से इन मजदूरों को भेजा जाए। महीनों लग जाएंगे जिन सात राज्यों ने स्पेशल ट्रेन चलाए जाने की मांग की है, उसमे तेलंगाना, केरल, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, राजस्थान, पंजाब, बिहार शामिल हैं। इन राज्यों का कहना है कि मजदूरों की संख्या बहुत ज्यादा है, लिहाजा इसके लिए स्पेशल ट्रेन चलाई जानी चाहिए क्योंकि बसों से इन्हें लाने में महीनों लग जाएंगे।

सबसे पहले केरल ने नॉनस्टॉप ट्रेन चलाने की मांग की थी। मुख्यमंत्री पिनारयी विजयन ने कहा था कि कई ऐसे लोग हैं जो अपने अपने घर जाना चाहते हैं। कई लोग दक्षिण भारत से उत्तर भारत जाना चाहते हैं, लिहाजा बस से जाना काफी थकाने वाला विकल्प है और इससे वायरस के फैलने का भी खतरा अधिक है। उन्होंने कहा कि केरल में 20000 से अधिक कैंप में 3.60 लाख से अधिक मजदूर हैं।

स्पेशल ट्रेन चलाए जाने पर विचार बता दें कि गृह मंत्रालय ने प्रवासी मजदूरों, छात्रों, मरीजों और उनके परिजनों के साथ-साथ पर्यटकों को राहत देते हुए आवाजाही की छूट दी है। यही नहीं केंद्र सरकार ने कहा है कि 3 मई को लॉकडाउन खत्म होने के बाद कई जिलों को भी इससे छूट दी जाएगी। सरकार ने अपनी गाइडलाइन में कहा है कि प्रवासी मजदूरों, छात्रों और अन्य लोग जो दूसरे राज्यों में फंसे हैं उन्हें बस से वापस भेजा जा सकता है।

लेकिन इस बीच कई राज्यों में स्पेशल ट्रेन की मांग सामने रखी है। सूत्रों की मानें तो रेल मंत्रालय ने भी इस बाबत अपनी योजना बनानी शुरू कर दी है। तकरीबन 400 स्पेशल ट्रेनें हर रोज चलाने की योजना बनाई जा रही है। हालांकि अभी तक इस बात के संकेत नहीं मिले हैं कि यात्री ट्रेनों का संचालन शुरू किया जाएगा या नहीं, लेकिन रेलवे ने सरकार के साथ मिलकर शीर्ष स्तर पर योजना बनानी शुरू कर दी है। रेलवे भी जुटा तैयारी में एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि हर बस में बमुश्किल 25 ही यात्री सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए बैठ सकते हैं।

रेलवे के विस्तृत प्रोटोकॉल में भी एक पैराग्राफ इस बाबत है कि जो राज्य इस रेलवे के रूट में हैं उन्हें इसकी अनुमति मिलनी चाहिए, स्क्रीनिंग, के बाद नियंत्रित करके यात्रियों को जाने देना चाहिए। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि प्रवासी मजदूरों को लेकर इतने लंबे समय से की जा रही मांग को आखिरकार स्वीकार कर लिया गया। यह स्वागत योग्य कदम है, लेकिन केंद्र सरकार को रेलवे को इसके लिए अनुमति देनी चाहिए। पिछले कुछ दिनों में तमिलनाडु, केरल, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, नॉर्थ ईस्ट के तकरीबन 6 लाख लोगों ने वापस आने के लिए रजिस्ट्रेशन कराया है, लिहाजा मैं अपील करता हूं कि रेलवे को इसके लिए अनुमति देनी चाहिए ताकि लोग अपने गंतव्य स्थान पर आसानी से पहुंच सके। तमाम मुख्यमंत्रियों ने स्पेशल ट्रेन की मांग की झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि उन्होंने रेलमंत्री पीयूष गोयल से बात की है, राज्यों को विशेष ट्रेनों की जरूरत होगी ताकि दूसरे राज्यों में फंसे छात्रों, प्रवासी मजदूरों को वापस लाया जा सके। राज्य के अनुसार तकरीबन 9 लाख झारखंड के लोग दूसरे राज्यों में फंसे हैं, जिसमे से 6.43 लाख प्रवासी मजदूर हैं।

इससे पहले महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने भी स्पेशल ट्रेन चलाने की पीएम मोदी से मांग की थी। केरल के मुख्यमंत्री पिनारयी विजयन ने भी यह मांग सरकार के सामने रखी थी। साथ ही ओडिशा, उत्तर प्रदेश, पंजाब की सरकारों ने भी इस तरह की ही मांग सामने रखी है। सरकार ने दी इजाजत दरअसल उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश ने अपने प्रवासी मजदूरों व छात्रों जोकि दूसरे राज्य में फंसे थे, उन्हें वापस लाने की प्रक्रिया शुरू कर दी थी।

जिसके बाद बुधवार को केंद्र सरकार ने निर्देश जारी करके कहा कि लॉकडाउन की वजह से जो प्रवासी मजदूर, तीर्थयात्री, पर्यटक, छात्र या अन्य लोग दूसरी जगहों पर फंसे हैं उन्हें उनके घर जाने की अनुमति होगी। बता दें कि पीएम मोदी के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान झारखंड, बिहार, ओडिशा ने केंद्र सरकार से कहा था कि बिना गाइडलाइन के वह उन लोगों को वापस नहीं ला सकते हैं जो दूसरे राज्यों में फंसे हैं।

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