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कानून व्यवस्था की स्थिति गम्भीर है,विधानसभा का विषेश सत्र तत्काल बुलाया जाय-पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव

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पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव

समाजवादी पार्टी के राश्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा है कि वर्तमान सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति तथा कोरोना वायरस के कारण उत्पन्न समस्याओं के समाधान पर कारगर कदम उठाने के लिए उत्तर प्रदेष विधानसभा का विषेश सत्र तत्काल बुलाया जाना चाहिए।
     विगत एक माह से ज्यादा समय बीत चुका है। जबकि लाॅकडाउन की अवधि में राज्य की जनता घरों में है। कुछ जनपदों में कोरोना का प्रकोप अभी भी जारी है। अस्पतालों में अन्य बीमारियों का इलाज नहीं हो पा रहा है। कोरोना इलाज के भय से जनता सहमी हुई है।

जांच किट की पर्याप्त उपलब्धता के अभाव में मरीजों की सही-सही संख्या का भी पता नहीं चल रहा है। प्रशासनिक तालमेल की कमी की स्थिति यह है कि आगरा से रात में ही एक बस भर कर कोरोना पाॅजिटिव को सैफई अस्पताल के लिए रवाना कर दिया, लेकिन सैफई के अस्पताल के प्रषासन को सूचना तक नहीं दी गई। सैफई में मरीज घंटों बाहर सड़क पर भर्ती के लिए इंतजार में बैठे रहे।
     कोरोना के खिलाफ लड़ाई लम्बी चलने वाली है। अभी तक राज्य सरकार केवल अधिकारियों के भरोसे है। विपक्ष संकट के समाधान में ऐसे सुझाव दे सकता है जिससे प्रभावी नियंत्रण होने में आसानी हो। इसके लिए विधानसभा का विषेश सत्र बुलाने में दिक्कत नहीं हो सकती क्योंकि पहले भी गतवर्श अक्टूबर 3 को राश्ट्रसंघ के विकास लक्ष्यों पर और नवम्बर 26 को संविधान दिवस पर विषेश अधिवेषन बुलाए जा चुके हैं।
     क्या मुख्यमंत्री जी का लोकतांत्रिक व्यवस्था में विष्वास नहीं है? उनका नौकरषाही पर पूर्णतः भरोसा ठीक नहीं। लाॅकडाउन की लम्बी अवधि में जनता की तकलीफें बढ़ी है। किसान पर बे-मौसम बरसात और ओलावृश्टि की मार पड़ी है। उसकी फसल को खरीद के लिए क्रय केन्द्र नहीं खुले हैं। दूसरे प्रांतों से पलायन कर बड़ी संख्या में श्रमिक आए हुए हैं। उद्योगधंधे बंद होने से बेरोजगारी बढ़ी है। अभी तक लाखों श्रमिक एवं छात्र दूसरे राज्यों में फंसे हुए हैं। कानून व्यवस्था की स्थिति गम्भीर है। रोजी-रोटी के अभाव में हालात बिगड़ने की आशंका है। लोकतंत्र में जनहित सर्वोपरि है। सत्ता और विपक्ष की संयुक्त भूमिका से ही प्रदेष के समक्ष उत्पन्न गम्भीर समस्याओं का निदान हो सकता है।

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